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सऊदी अरब में पाकिस्तान-तुर्किये की सेना होगी तैनात: हूती विद्रोहियों से तनाव के बीच बड़ा फैसला; क्या है योजना?

Tue, 06 Oct 2026 04:25 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 06 Oct 2026 04:25 AM IST
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Pakistan, Saudi Arabia, Turkiye agree on rapid deployment of forces in the kingdom
पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये में सैन्य बलों की तैनाती पर सहमति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने सऊदी अरब में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती के लिए जरूरी कदम उठाने पर सहमति जताई है। यह फैसला सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
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डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बताया कि तीन देशों के मक्का रक्षा गठबंधन की रणनीतिक, राजनीतिक और रक्षा समिति की सोमवार को रियाद में आपात बैठक हुई। बैठक में सऊदी अरब के सामने मौजूद सुरक्षा से जुड़े हालात और खतरों पर चर्चा की गई। 
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पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने अगस्त में तीन देशों के बीच रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा।
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सैन्य बलों की तैनाती कितनी जल्दी होगी?
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के हवाले से डॉन ने बताया कि समिति ने सामूहिक रक्षा से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को तुरंत लागू करने का फैसला किया। समिति ने जरूरी सैन्य बल और क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी सहमति जताई। इन सैन्य बलों की सऊदी अरब में तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने की बात कही गई।

हालांकि, बयान में सैनिकों की तैनाती के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। यह भी नहीं बताया गया कि सैनिकों को कब और कितनी संख्या में तैनात किया जाएगा। बयान में हूती विद्रोहियों का खतरे के तौर पर सीधे नाम नहीं लिया गया। लेकिन यह फैसला सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों की पृष्ठभूमि में हुआ है। पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बैठक में हिस्सा लिया। 

पाकिस्तान और तुर्किये की सेना क्या कर रही है?
ख्वाजा आसिफ ने जियो न्यूज के कार्यक्रम 'आज शाहजेब खांजादा के साथ' में फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि पाकिस्तान और तुर्किये की सेना की क्षेत्र में मौजूदगी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि लड़ाई से जुड़े अभियानों में केवल सऊदी सैनिक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को जिस भी मदद की जरूरत है, वह दी जा रही है। फिलहाल तुर्किये और पाकिस्तान की सेनाएं सहयोगी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान निगरानी और जानकारी जुटाने के काम में शामिल है।

मक्का और मदीना को निशाना बनाने की कोशिश की निंदा
मक्का रक्षा गठबंधन के तीनों सदस्यों ने मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों को निशाना बनाने की कोशिश की भी निंदा की। संयुक्त बयान में सऊदी अरब के शहरों पर जारी हमलों की भी निंदा की गई। नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने पर भी तीनों देशों ने विरोध जताया।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बताया कि पाकिस्तान और तुर्किये ने सऊदी सशस्त्र बलों की सतर्कता, तैयारी और पेशेवर क्षमता की सराहना की।

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उन्होंने खतरों और हमलों का सामना करने के लिए सऊदी सेना की भूमिका की तारीफ की। साथ ही सऊदी अरब की सुरक्षा और उसकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

हूतियों के खिलाफ सऊदी गठबंधन ने क्यों शुरू किया सैन्य अभियान?
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, तीन देशों की बैठक ऐसे समय हुई, जब यमन की सऊदी नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने रविवार को बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान का मकसद हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को फिर से अपने नियंत्रण में लेना है।

 
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