तमाम अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण की दुनिया में लगातार आगे बढ़ रहा है। कई बार भले ही उत्तर कोरिया को अपने मिसाइल परीक्षण में नाकामी का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उसका उत्साह कम नहीं हुआ।
मिसाइलों का 'बादशाह' है-किम जोंग, अमेरिका भी खाता है खौफ!
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 के दौरान जितने भी टेस्ट किए उतने ही एक के बाद एक उत्तर कोरिया ने भी कर डाले। विशेषज्ञ कहते हैं कि नॉर्थ कोरिया ने अपने हर एक टेस्ट के बाद अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी को और बेहतर करता रहा है। कुछ विशेषज्ञों का यहां तक भी कहना है कि साइबर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के जरिए उत्तर कोरिया की इस बढ़ती मिसाइल टेक्नोलॉजी को रोकने की भी कोशिश की।
क्यों करता है उत्तर कोरिया मिसाइल टेस्ट
उत्तर कोरिया मिसाइल टेस्ट राजनीतिक प्रभाव दिखाने के लिए करता रहा है। बीजिंग में बन वेल्ट वन रोड की लॉन्चिंग के दौरान मई में उत्तर कोरिया में मिसाइल टेस्ट किया। ये चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। फरवरी का लॉन्च उस वक्त किया जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिले थे। उत्तर कोरिया के ज्यादातर टेस्ट ऐसे ही मौकों पर किए गए हैं।
क्या चाहता है उत्तर कोरिया और क्यों?
प्योंगयोंग का उद्देश्य ऐसी मिसाइल का निर्माण करना है जो कि अमेरिका तक मारक क्षमता रखती हो। उन्हें लगता है कि अमेरिका किम जोंग उन को उसकी पावर से हटाना चाहता है। उत्तर कोरिया को लगता है कि अमेरिका इस वजह से ऐसा नहीं करता क्योंकि वो सोचता है कि अगर ऐसा किया तो उत्तर कोरिया परमाणु मिसाइल के जरिए उसपर हमला कर सकता है।
उत्तर कोरिया से कितन करीब हैं देश?
अभी तक उत्तर कोरिया ऐसी किसी मिसाइल टेक्नोलॉजी का निर्माण नहीं कर पाया है जो एशिया से बाहर मिसाइल कर सकता हो, लेकिन वो अपने पड़ोसी देशों जापान और दक्षिण कोरिया पर इसका इस्तेमाल बखूबी कर सकता है। प्योंगयोंग के हथियारों के जखीरे में अभी उनके पास वो हथियार मौजूद हैं जिनसे वो दक्षिण कोरिया और जापान पर बखूबी निशाना बन सकता है।