Dakhil kharij kya hota Hai: हमारे देश में किसी भी व्यक्ति के लिए घर या जमीन खरीदना बहुत खुशी की बात होती है। लोग सालों से पैसे इकट्ठा करने के बाद प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बनाते हैं। घर या जमीन खरीदते समय कई तरह के कागजी काम करने होते हैं। इसके लिए रजिस्ट्री करना होता है और फिर दाखिल खारिज भी करना होता है। जिन लोगों को प्रॉपर्टी खरीदने की समझ है वो लोग दाखिल खारिज शब्द जरूर सुने होंगे। अगर कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी खरीद रहा है, ऐसे में उसे प्रॉपर्टी की दाखिल खारिज कराना बहुत जरूरी होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया जिसे प्रॉपर्टी खरीदने के बाद कुछ ही दिनों के अंदर करना होता है।
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दाखिल खारिज की प्रक्रिया
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दाखिल खारिज से मिलता है मालिकाना हक
अगर प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज नहीं होता है तो कानून आपको उसका मालिकाना हक नहीं देता है। आपको इस बारे में पता होना चाहिए कि रजिस्ट्री कराने के साथ-साथ प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज कराना भी बहुत जरूरी होता है। वैसे तो दाखिल खारिज की प्रक्रिया अलग-अलग राज्य में भिन्न हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर लगभग हर राज्य की प्रक्रिया लगभग एक जैसी होती है। आइए इस लेख में जानते हैं कि दाखिल खारिज की पूरी प्रक्रिया क्या है और इसके लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है।
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दाखिल खारिज से मिलता है मालिकाना हक
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सबसे पहले, संपत्ति के नए मालिक को संबंधित तहसील कार्यालय में एक आवेदन देना होता है। इस आवेदन में संपत्ति के विवरण, पुराने और नए मालिकों का नाम, संपत्ति के हस्तांतरण का कारण आदि जानकारी शामिल होती है।
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दाखिल खारिज की प्रक्रिया
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आवेदन के साथ कुछ दस्तावेज भी जमा करने होते हैं, जैसे कि संपत्ति का विक्रय समझौता, पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण पत्र आदि। आवेदन जमा करते समय निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होता है। यह शुल्क अलग-अलग राज्यों के लिए भिन्न हो सकता है। इसके बाद तहसील कार्यालय आवेदन और दस्तावेजों की जांच करता है।
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दाखिल खारिज के नियम
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कई मामलों में, तहसील कार्यालय संपत्ति के हस्तांतरण के बारे में एक विज्ञापन प्रकाशित करता है, ताकि किसी भी दावेदार को अपनी आपत्ति दर्ज करने का मौका मिल सके। यदि कोई आपत्ति नहीं आती है, तो तहसील कार्यालय एक आदेश जारी करता है जिसमें संपत्ति के नए मालिक को उसका मालिकाना हक मिल जाता है।