घर खरीदना हर किसी के लिए बड़ा फैसला होता है। ऐसे में सिर्फ यह देखना कि घर की कीमत कितनी है या बैंक कितना होम लोन दे सकता है, काफी नहीं है। लोन लेने से पहले अपनी महीने की कमाई, पहले से चल रहे कर्ज, घर का खर्च और बचत का भी हिसाब लगाना जरूरी है। क्योंकि बैंक से लोन मिल जाना और उस लोन की ईएमआई आराम से चुका पाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
एक लाख रुपये सैलरी में ले सकते हैं एक करोड़ का घर? जानें ईएमआई से लेकर डाउन पेमेंट तक का गणित
Home Loan: घर खरीदते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि बैंक कितना होम लोन देने को तैयार है। अपनी महीने की कमाई, पहले से चल रहे कर्ज, घर के खर्च और बचत को देखकर ही तय करना चाहिए कि कितनी ईएमआई आराम से भरी जा सकती है। ज्यादा डाउन पेमेंट करने से लोन और ईएमआई दोनों कम हो सकते हैं।
75 लाख रुपये के होम लोन की कितनी EMI
मान लीजिए 1 करोड़ रुपये का घर खरीदना है और आपके पास 25 लाख रुपये डाउन पेमेंट के लिए हैं। ऐसे में 75 लाख रुपये का होम लोन लेना होगा। अगर ब्याज दर 7.75 फीसदी और लोन की अवधि 30 साल है, तो ईएमआई करीब 53,700 रुपये महीने बैठेगी। 30 साल तक यह ईएमआई चुकाने पर कुल भुगतान करीब 1.93 करोड़ रुपये होगा। इसमें करीब 75 लाख रुपये मूल कर्ज और करीब 1.18 करोड़ रुपये ब्याज होगा। यानी 75 लाख रुपये के लोन के लिए लंबी अवधि में ब्याज की रकम काफी बड़ी हो सकती है।
1 लाख रुपये की सैलरी में कितना बचेगा
अब अगर किसी व्यक्ति की महीने की कमाई 1 लाख रुपये है और उसकी होम लोन की ईएमआई करीब 53,700 रुपये है, तो आधे से ज्यादा कमाई सिर्फ ईएमआई में चली जाएगी। इसके बाद घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बीमा, निवेश और अचानक आने वाले खर्चों के लिए करीब 46 हजार रुपये बचेंगे। यही वजह है कि सिर्फ लोन मिल जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह लोन आपकी जेब के लिए आरामदायक भी है।
ज्यादा डाउन पेमेंट से घट सकती है EMI
अगर 1 करोड़ रुपये के घर के लिए 25 लाख की जगह 40 लाख रुपये डाउन पेमेंट कर दिए जाएं तो होम लोन घटकर 60 लाख रुपये रह जाएगा। 7.75 फीसदी ब्याज और 30 साल की अवधि पर इसकी ईएमआई करीब 42,985 रुपये होगी। यानी 75 लाख रुपये के लोन की तुलना में हर महीने करीब 10,700 रुपये कम ईएमआई देनी होगी।
75 लाख रुपये लोन पर करीब 53,731 रुपये।
70 लाख रुपये लोन पर करीब 50,150 रुपये।
65 लाख रुपये लोन पर करीब 46,570 रुपये।
60 लाख रुपये लोन पर करीब 42,985 रुपये।
इसलिए घर खरीदते समय अपनी पूरी कमाई ईएमआई में लगाने के बजाय ऐसा लोन चुनना बेहतर होता है जिसे बाकी जरूरी खर्चों और बचत के साथ संभाला जा सके। डाउन पेमेंट जितना ज्यादा होगा, आम तौर पर लोन की रकम और ईएमआई उतनी ही कम होगी।
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