ऑनलाइन शॉपिंग में सामान की तस्वीर और उसके बारे में किए गए दावों को देखकर खरीदारी करना आम बात है। लेकिन अगर सामान घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद खराब हो जाए और शिकायत करने के बाद भी समाधान न मिले तो ग्राहक के पास उपभोक्ता आयोग जाने का रास्ता है। ऐसा ही एक मामला वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग में सामने आया, जहां खराब रॉकिंग चेयर के मामले में ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया गया है। आयोग ने निर्माता, विक्रेता और ऑनलाइन मार्केटप्लेस को मिलकर कुल 37 हजार 768 रुपये देने का आदेश दिया है। तो आइए जानते हैं कि पूरी कहानी क्या है।
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Defective Rocking Chair: ऑनलाइन खरीदी गई रॉकिंग चेयर कुछ ही महीनों में खराब हो गई। शिकायत के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। आयोग ने खरीद की रकम लौटाने के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए भी मुआवजा देने का आदेश दिया।
बुजुर्ग माता-पिता के लिए खरीदी थी कुर्सी
मामला 29 साल की एक महिला का है, जो पेशे से वकील हैं। उन्होंने अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से शीशम की लकड़ी की रॉकिंग चेयर खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने 12 हजार 768 रुपये का भुगतान किया था। महिला ने बताया कि खरीदारी करते समय कुर्सी की क्वालिटी और टिकाऊपन से जुड़े दावों को देखकर उन्होंने इसे खरीदा था।
कुछ महीनों में लकड़ी में आने लगी दरारें
महिला के मुताबिक कुर्सी का इस्तेमाल सामान्य तरीके से किया जा रहा था, लेकिन कुछ ही महीनों में उसके लकड़ी वाले हिस्सों और जोड़ों में कई जगह दरारें दिखाई देने लगीं। इससे कुर्सी कमजोर हो गई और बुजुर्ग माता-पिता के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई। इसके बाद महिला ने विक्रेता और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से शिकायत की। उन्होंने खराब कुर्सी की तस्वीरें और वीडियो भी भेजे। महिला ने कुर्सी बदलने, उसकी मरम्मत कराने या फिर पैसे वापस करने की मांग की, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
मरम्मत का आश्वासन भी काम नहीं आया
महिला ने इसके बाद कानूनी नोटिस भेजा और उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी नोट किया कि निर्माता और विक्रेता ने तय समय में अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया था। वहीं, निर्माता की ओर से महिला को व्हाट्सऐप पर बताया गया था कि कुर्सी की मरम्मत उनके घर पर कराई जाएगी और इसका खर्च संबंधित पक्ष उठाएंगे। लेकिन शिकायतकर्ता को प्रभावी राहत नहीं मिली।
वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में दोषपूर्ण उत्पाद की आपूर्ति और शिकायत के बाद उचित समाधान नहीं मिलने को सेवा में कमी माना। आयोग ने निर्माता, विक्रेता और ऑनलाइन मार्केटप्लेस को संयुक्त रूप से 12 हजार 768 रुपये की खरीद राशि वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा महिला को हुई मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए पांच हजार रुपये देने को कहा गया। इस तरह कुल रकम 37 हजार 768 रुपये हुई। आयोग ने आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है। इस मामले से साफ है कि ऑनलाइन खरीदा गया सामान खराब निकलने पर सिर्फ कंपनी से शिकायत करके रुकना जरूरी नहीं है। अगर शिकायत के बावजूद उचित समाधान नहीं मिलता तो उपभोक्ता आयोग में शिकायत की जा सकती है।
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