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क्या बिल बकाया होने पर अस्पताल रोक सकता है शव या डिस्चार्ज? जानिए मरीज के कानूनी अधिकार

Mon, 28 Sep 2026 01:49 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Mon, 28 Sep 2026 01:49 PM IST
सार

Can Hospitals Hold Body Over Unpaid Bills: कई बार ऐसा होता है कि कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल मरीज के इलाज का पैसा न जमा होने पर शव देने से इंकार करते हैं या डिसचार्ज करने से भी मना करते हैं और बदले में पैसे देने का दबाव बनाते हैं। आइए इस लेख इसी के बारे में समझते हैं कि क्या कोई अस्पताल किसी मरीज को या शव को बंधक बनाकर रख सकता है?

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Can Hospitals Hold Patient or Body Over Unpaid Bills Know Patient Rights in hindi
अस्पताल बकाया बिल नियम - फोटो : AI

Patient Rights Charter India Rules: अक्सर ऐसा देखा जाता है कि इलाज का भारी-भरकम बिल बकाया होने पर कुछ निजी अस्पताल मरीज को डिस्चार्ज करने से मना कर देते हैं या दुखद परिस्थिति में मृतक का शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर देते हैं। मगर क्या कानूनन अस्पतालों को ऐसा करने का अधिकार है?



भारत के कानून और स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों के अनुसार कोई भी अस्पताल, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट, बकाया बिल के भुगतान न होने के आधार पर न तो किसी जीवित मरीज को बंधक बना सकता है और न ही किसी शव को रोक सकता है। ऐसा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।

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संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन - फोटो : अमर उजाला

संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन

  • माननीय सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि बकाया बिल की वसूली के लिए किसी शव को रोकना या जीवित व्यक्ति को बंधक बनाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
  • मृतक का अंतिम संस्कार गरिमा के साथ पाना उसका मौलिक अधिकार है और शव को बंधक बनाना अपराध की श्रेणी में आता है।
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पेशेंट राइट्स चार्टर और स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस - फोटो : Adobe Stock

पेशेंट राइट्स चार्टर और स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी 'पेशेंट राइट्स चार्टर' के तहत मरीज और उसके परिजनों को कई अधिकार दिए गए हैं।
  • नियमों के मुताबिक डॉक्टर द्वारा डिस्चार्ज घोषित किए जाने के बाद अस्पताल मरीज को सिर्फ पैसे न देने के कारण रोक नहीं सकता।
  • भुगतान से जुड़ा कोई भी विवाद परिजनों और अस्पताल के बीच है तो यह एक अलग विषय है, जिसे प्रशासनिक या कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।
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अस्पतालों के पास बकाया वसूली का सही कानूनी रास्ता - फोटो : AI

अस्पतालों के पास बकाया वसूली का सही कानूनी रास्ता

  • अस्पताल को अपने बकाया पैसों की वसूली का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए सही प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
  • अस्पताल पैसे वसूलने के लिए सिविल कोर्ट में केस दर्ज कर सकता है, परिजनों को कानूनी नोटिस भेज सकता है या फिर आपसी सहमति से भुगतान की समय-सीमा तय कर सकता है।
  • किसी भी स्थिति में मरीज या शव को रोककर दबाव बनाना पूरी तरह गैर-कानूनी होता है।
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अस्पताल द्वारा मनमानी करने पर तुरंत कहां करें शिकायत? - फोटो : Adobe Stock

अस्पताल द्वारा मनमानी करने पर तुरंत कहां करें शिकायत?

  • अगर कोई अस्पताल बकाया बिल के कारण शव या मरीज को रोकने की कोशिश करता है, तो परिजन तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता के तहत अवैध रूप से बंधक बनाने की एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
  • इसके अलावा, राज्य मानवाधिकार आयोग, जिला मजिस्ट्रेट या राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से भी लिखित शिकायत की जा सकती है।
  • ऐसे मामलों में प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करके राहत दिलाता है।
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