भारतीय टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा आज अपना 32वां जन्मदिन मना रही हैं। 15 नवंबर 1986 को मुंबई में जन्मी सानिया ने टेनिस की दुनिया में भारत को अलग पहचान दिलाई। उन्होंने अपने करियर में कई ग्रैंडस्लैम खिताब जीते। बता दें कि सानिया का जन्म जरूर मुंबई में हुआ, लेकिन उनका बचपन हैदराबाद में बीता, जहां से उन्होंने टेनिस खेलने की शुरुआत भी की।
सानिया के पिता इमरान मिर्जा एक खेल पत्रकार रहे। शिया खानदान में जन्म लेने वाली सानिया ने महज छह साल की उम्र से ही हैदराबाद के निजाम क्लब में टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। शुरुआती दिनों में प्रसिद्घ खिलाड़ी सीके भूपति से सानिया को टेनिस की ट्रेनिंग मिली। बेहद साधारण परिवार से संबंध रखने वाली सानिया को करियर के शुरुआती दिनों में पैसों की तंगी का सामना भी करना पड़ा। हालांकि, कई स्पोर्ट्स ब्रांड्स से जुड़ने के बाद सानिया को काफी हद तक आर्थिक मदद मिली।
सानिया ने अपने करियर की शुरुआत 1999 में विश्व जूनियर टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर की। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिस्सा लिया और सफलता भी पाई। 2003 उनके जीवन का सबसे रोचक मोड़ बना, जब भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद सानिया ने विंबल्डन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की। डब्ल्यूटीए के एकल रैंकिंग में सानिया का सर्वश्रेष्ठ स्थान 27 रहा है। यह किसी भी भारतीय टेनिस खिलाड़ी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग है।
वर्ष 2004 में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2009 में वह भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं। उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर टूर्नामेंट्स जीत कर देश का नाम रोशन किया। फिर बात चाहे जूनियर विंबलडन चैंप बनने की हो या कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने की, सानिया ने हर जगह देशवासियों को गौरान्वित किया।
टाइम पत्रिका ने सानिया मिर्जा का नाम टॉप 50 हीरोज में शामिल किया। 2010 में सानिया मिर्जा का नाम इकॉनोमिक्स टाइम ने उन 33 महिलाओं में शामिल किया, जिन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया। 32 वर्षीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने एफ्रो एशियाई, एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स खेलों को मिलाकर कुल 12 मेडल्स अपने नाम किए। एफ्रो एशियाई खेलों में सानिया ने कुल मिलाकर चार गोल्ड मेडल जीते हैं। एशियाई खेलों में सानिया ने एक गोल्ड, तीन सिल्वर और दो कांस्य जीते, जबकि कॉमनवेल्थ गेम्स में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता।