कबड्डी में महारथी माने जाने वाले भारत को एशियाई खेलों में पुरूष और महिला टीमों को ईरान से मिली हार लंबे समय तक याद रहेगी, लेकिन महिला टीम के कोच श्रीनिवास रेड्डी को मानना है कि यह अब वैश्विक खेल बन गया है।
एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार भारत कबड्डी में बादशाहत कायम करने में सफल नहीं रहा। ईरान ने महिलाओं के फाइनल में भारत को 27-24 से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय पुरूष टीम को कल सेमीफाइनल में ईरान से 18-27 से हार का सामना करना पड़ा था। पुरूष टीम हालांकि कांस्य पदक जीतने में सफल रही थी।
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रेड्डी ने कहा कि भारतीय टीम अब अपने विरोधियों को हलके में नहीं ले सकती क्योंकि वे हमारे खेल को करीब से देख रहे हैं। हां, इस हार से दुख हो रहा है क्योंकि हम यहां स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाने आए थे। यह खेल अब वैश्विक हो गया है। दूसरी टीमें भी अब अपने मौके तलाश रही है। यह अब ओलंपिक खेल बनने की ओर है।
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उन्होंने कहा, 'चीनी ताइपे ने 2014 में यह खेल खेलना शुरू किया, लेकिन वह इस बार पोडियम (कांस्य पदक) पर है। इसका यह मतलब है कि ये खेल तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह कबड्डी की जीत है। ईरान की महिला टीम की कोच भारत की शैलजा जैन थी, लेकिन भारतीय कोच ने कहा कि इसका श्रेय उन लोगों को जाता है जिन्होंने टीम को नीचले पायदान से खड़ा किया।'
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उन्होंने कहा, 'कई भारतीय कोच वहां गए हैं, लेकिन उनके लिए यह कई वर्षों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। किसी कोच के पास कोई जादू नहीं हैं कि टीम को छह महीने में बदल दें। उन्हें इसका श्रेय इसलिए मिल रहा क्योंकि टीम ने उनके रहते जीत दर्ज की।'