भारत की उभरती हुई धावक हिमा दास ने कहा कि वह अपने टाइमिंग में सुधार करने के लिए कोच के साथ कड़ी मेहनत कर रही हैं। 'ढिंग एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर हिमा ने बुधवार को कहा, 'मैंने एशियाई खेल और अन्य स्पर्धाओं में जरूर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अभी काफी सुधार की जरूरत है। मैं अपने कोच निपुण दास के साथ कड़ी मेहनत कर रही हूं ताकि आगे रेस में और बेहतर प्रदर्शन कर सकूं।'
हिमा दास का लक्ष्य है कि वह भविष्य में होने वाली रेस में शानदार प्रदर्शन करें और देश के लिए गोल्ड मेडल जीते। पता हो कि हिमा दास ने फिनलैंड में हुई आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था। वह इस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बनीं। इसके बाद 18 वर्षीया ने जकार्ता और पालेमबांग में संपन्न एशियाई खेल में एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता।
एशियाई खेलों में हिमा दास ने 400 मीटर फाइनल में क्वालिफाई करने के लिए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 51.00 समय के साथ फाइनल के लिए क्वालिफाई किया। इसके बाद फाइनल में उन्होंने अपने समय को और बेहतर किया व 50.79 के समय में रेस पूरी करके सिल्वर मेडल जीता।
हिमा ने एक सेकंड कम करने की अहमियत को भी समझाया। उन्होंने कहा, 'एक सेकंड कम करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए पूरा जोर लगाना होता है। कभी स्टांस पर ध्यान देना होता है तो कभी ध्यान रखना होता है कि कब कर्व लेना है या फिर शुरुआत कैसे करनी है। इन सभी बारीकियों पर ध्यान देना होता है। मेरे कोच इसे बेहतर रूप से जानते हैं और वो मुझ पर मेहनत कर रहे हैं।'
इसके अलावा हिमा ने बताया कि एशियाई खेलों में मेडल जीतने के बाद वह बहुत खुश थीं। मगर उन्हें तब भी बहुत खुशी हुई जब फिनलैंड में आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। हिमा ने कहा, 'रेस जीतने के बाद मैंने घर फोन करके जानकारी दी। थोड़ी देर बाद राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर मेरी कई फोटोज आईं। मैंने जब अपना फोन देखा तो बहुत खुशी हुई और लगा कि कोई बड़ा काम किया है।'
हिमा दास अब अगले साल दोहा में होने वाली रेस की तैयारियों में जुटी हैं और उनका लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना है।