एशियाई खेलों के करीब डेढ़ माह बाद बागपत के शूटर सौरभ चौधरी ने फिर इतिहास रच दिया। कलीना गांव का लाल बिनौली की वीर शाहमल राइफल एकेडमी में तपकर कुंदन बना और यूथ ओलंपिक में भी देश को सोना दिला दिया । एशियाई खेलों की बड़ी कामयाबी के बाद वह घर नहीं लौटे और कड़ी मेहनत की। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और अब यूथ ओलंपिक का पदक लेकर वह अपने गांव कलीना और बिनौली की शूटिंग रेंज पर लौटेंगे। कामयाबी पर कोच अमित श्योराण ने कहा कि सौरभ चौधरी ने पदक का वायदा पूरा कर दिखाया। गौरतलब है कि डेढ़ माह में सौरभ पांच पदक जीत चुके है।
सौरभ चौधरी ने यूथ ओलंपिक में गोल्ड पर साधा निशाना, भावुक कर देगी इस किसान के बेटे की कहानी
करीब डेढ़ माह में जीता है तीसरा स्वर्ण पदक
मेरठ के कलीना गांव के 16 साल के निशानेबाज सौरभ चौधरी बागपत के बिनौली की वीर शाहमल शूटिंग एकेडमी में निशानेबाजी का अभ्यास करते है। इंडोनेशिया के जकार्ता में 21 अगस्त को 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने वाले होनहार ने पिछले करीब डेढ़ माह में तीसरा स्वर्ण पदक जीता है। एशियाई खेलों के बाद सौरभ ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में व्यक्तिगत गोल्ड समेत तीन पदक जीते थे। अब अर्जेंटीना में चल रहे यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर खुद को विश्व स्तर पर साबित कर दिखाया। कोच अमित श्योरण कहते हैं कि एशियाई खेलों और विश्वकप के बाद यूथ ओलंपिक में समय कम बचा था, इस वजह से वह अभ्यास में जुटे रहे। अर्जेंटीना से लौटने के बाद वह दिल्ली में स्क्वायड के ट्रायल में शामिल होंगे और 20 अक्तूबर के आसपास बिनौली और कलीना अपने गांव पहुंचेंगे।
पांच मेडल के बाद शाहमल एकेडमी पर जश्न
पांच पदक झटकने वाले सौरभ चौधरी की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। सिर्फ तीन साल में किसान का यह बेटा गोल्डन ब्वाय बन गया। कोच अमित श्योराण की पिस्टल से साल 2015 में दिल्ली में आयोजित 59वीं नेशनल चैंपियनशिप में यूथ वर्ग का गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद सौरभ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। परिवार ने साथ दिया और पिस्टल खरीदकर दी। सर्दी गर्मी बरसात हर मौसम में रोज 12 किमी का सफर टैंपो से करते हुए सौरभ कलीना से बिनौली तक जाता रहा और यहां करीब आठ घंटे तक नियमित अभ्यास करने से वह तपकर कुंदन बन गए। एकेडमी पर खुशी का माहौल है।
भाई ने शुरू कराई निशानेबाजी, सौरभ साबित हुआ अर्जुन
स्वर्ण पदक विजेता सौरभ चौधरी के निजी कोच अमित श्योराण और उसके भाई नितिन चौधरी बताते हैं मार्च 2015 में कलीना गांव के किसान जगमोहन सिंह के बेटे सौरभ चौधरी ने शूटिंग सीखने की इच्छा जताई। अप्रैल 2015 में बड़े भाई नितिन चौधरी सौरभ को लेकर बिनौली पहुंचे और कोच अमित श्योराण से मिलकर एडमिशन कराया। यहां से शुरू हुआ सौरभ चौधरी की मेहनत और सफलता का सिलसिला। रेंज पर पहली बार पिस्टल देखी। शुरूआत अभ्यास के बाद कोच अमित श्योराण ने सौरभ को अपनी पिस्टल से खेलने का अवसर दिया।
बेटा निखरा तो किसान पिता ने खरीदी पिस्टल
कामयाबी मिलनी शुरू हुई तो कोच और परिवार ने सौरभ की प्रतिभा को परख लिया। साल 2016 में करेल के त्रिवेंद्रम में यूथ खेलों में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीतकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। साल 2016 में कई विदेशी दौरे हुए, लेकिन पहली बड़ी कामयाबी मिली साल 2017 में 22 से 29 जून तक जर्मनी के सुहल में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीता। उनकी सफलताओं का सिलसिला यूथ ओलंपिक तक जारी है। कोच की पिस्टल से खेलने वाले सौरभ को परिवार ने किसी तरह करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर पिस्टल दिलाई। भाई नितिन चौधरी बताते हैं कि सौरभ के जुनून को देखते हुए ही परिवार ने पिस्टल दिलाने का फैसला किया था। अपनी पिस्टल से उन्हें बेहद लगाव है।
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