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मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती सिखने वालों के लिए गुड न्यूज, वर्ल्ड रेसलिंग से मिला डबल तोहफा, जानिए
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Updated Sat, 08 Dec 2018 08:57 AM IST
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महिला पहलवान
- फोटो : अमर उजाला
मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती के दांवपेंच सीखने वाले पहलवानों के लिए अच्छी खबर है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से खिलाड़ियों को डबल तोहफा दिया गया है। इससे खेल को पहचान मिलने के साथ-साथ नौकरियों के लिए दरवाजे भी खुलेंगे।
कुश्ती
दरअसल, मिट्टी के अखाड़ों में कराई जाने वाली कुश्ती को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से मान्यता मिल गई है। वहां से मान्यता मिलते ही भारतीय कुश्ती संघ ने मिट्टी के अखाड़ों में पहली नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप कराने की तैयारी भी शुरू कर दी, जिसे पूना में कराया जाएगा। उस नेशनल में स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहलवान भिड़ेंगे और वहां मिलने वाले मेडल को मैट वाली कुश्ती की तरह ही मान्यता रहेगी।
कुश्ती
जीतने पर सरकार से इनाम भी मिलेगा तो नौकरी के लिए भी वह मेडल मंजूर होगा। कुश्ती के शुरूआती दांवपेंच अधिकतर पहलवान मिट्टी के अखाड़े में सीखते हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र से बाहर निकलकर जिला स्तर पर भी मैट पर कुश्ती लड़नी पड़ती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि यूडब्ल्यूडब्ल्यू से मिट्टी के अखाड़ों में होने वाली कुश्ती को मान्यता नहीं थी और किसी जगह कुश्ती कराई जाती थी तो वहां मिलने वाले मेडल किसी काम के नहीं होते थे।
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कुश्ती
अब मिट्टी के अखाड़ों में होने वाली कुश्ती को यूडब्ल्यूडब्ल्यू से मान्यता मिल गई है और पूना में जनवरी में मिट्टी के अखाड़े में पहली नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप होगी। इस चैंपियनशिप के पहली बार होने के कारण सभी प्रदेशों की एक-एक टीम हिस्सा लेगी। लेकिन इसके बाद जब चैंपियनशिप होगी तो उसमें पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर आने वाले प्रदेशों की दो-दो टीम हिस्सा ले सकेगी।
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कुश्ती
हरियाणा व यूपी के पहलवानों को फायदा, सरकार इनाम भी देगी
मिट्टी के अखाड़ों में होने वाली कुश्ती को मान्यता मिलने से सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा व यूपी के पहलवानों को हुआ है तो पंजाब व दिल्ली के पहलवानों को भी इसका फायदा मिलेगा। क्योंकि इन प्रदेशों में सबसे ज्यादा पहलवान गांवों के मिट्टी वाले अखाड़ों से शुरूआत करते हैं। जिनमें कई बार ऐसे भी पहलवान होते हैं जो केवल मिट्टी के अखाड़ों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, लेकिन वह मैट पर कामयाब नहीं होते हैं। विशेष तौर पर ऐसे पहलवानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इसमें भी नेशनल में मेडल लेकर आने वालों को जिस तरह से सरकार की ओर से मैट पर कुश्ती करने वालों को इनाम दिया जाता है, उसी तरह से उस मेडल पर इनाम दिया जाएगा और नौकरी के लिए भी वह दावेदारी कर सकेंगे।
मिट्टी के अखाड़ों में होने वाली कुश्ती को मान्यता मिलने से सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा व यूपी के पहलवानों को हुआ है तो पंजाब व दिल्ली के पहलवानों को भी इसका फायदा मिलेगा। क्योंकि इन प्रदेशों में सबसे ज्यादा पहलवान गांवों के मिट्टी वाले अखाड़ों से शुरूआत करते हैं। जिनमें कई बार ऐसे भी पहलवान होते हैं जो केवल मिट्टी के अखाड़ों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, लेकिन वह मैट पर कामयाब नहीं होते हैं। विशेष तौर पर ऐसे पहलवानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इसमें भी नेशनल में मेडल लेकर आने वालों को जिस तरह से सरकार की ओर से मैट पर कुश्ती करने वालों को इनाम दिया जाता है, उसी तरह से उस मेडल पर इनाम दिया जाएगा और नौकरी के लिए भी वह दावेदारी कर सकेंगे।