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12 साल लड़े...पर जीत न सके, जानिए बिग्रेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी की वो आखिरी ख्वाहिश

Sun, 18 Nov 2018 04:10 PM IST
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 18 Nov 2018 04:10 PM IST
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Chandigarh, Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Last Wish
कुलदीप सिंह चांदपुरी
12 साल तक लंबी लड़ाई लड़ी, पर वे जीत न सके। जानिए बिग्रेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी की वो आखिरी ख्वाहिश, जिसे वो पूरी करना चाहते थे।
Chandigarh, Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Last Wish
कुलदीप सिंह चांदपुरी
ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी ने अपने शहर में सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए भी लंबी जंग लड़ी मगर अफसोस वे इसमें कामयाब न हो सके। उनकी ख्वाहिश थी कि सेक्टर सात के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में एथलीट्स के लिए एक सिंथेटिक ट्रैक बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने खेल अधिकारियों से लेकर एडवाइजर और गवर्नर को कई सारे पत्र लिखे। मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
Chandigarh, Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Last Wish
कुलदीप सिंह चांदपुरी
कुलदीप सिंह चंडीगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन में 12 साल तक प्रधान पद पर रहे। पिछले साल ही उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा था। प्रधान पद का चार्ज संभालते वे अपने ट्रैक में आ गए। फौज की तरह उन्होंने भी यहां पर एथलीटों के लिए कई नेशनल लेवल के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया। उसमें पूरे देश के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और शहर का मान बढ़ाया।
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Chandigarh, Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Last Wish
कुलदीप सिंह चांदपुरी
स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के पूर्व सीनियर एथलेटिक्स कोच शिव कुमार जोशी के अनुसार इंटरनेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए सिंथेटिक ट्रैक का होना जरूरी होता है, जो चंडीगढ़ में एक भी नहीं है। सीनियर एथलेटिक्स कोच इकबाल सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। चांदपुरी ने सिंथेटिक ट्रैक बनवाने काफी कोशिश की। वे जानते थे कि यदि खिलाड़ियों को इंटरनेशनल स्तर की प्रैक्टिस मिले तो वे भी कमाल कर सकते हैं।
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Chandigarh, Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Last Wish
फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह
मिल्खा बोले, एथलीटों के लिए काफी काम किया
मिल्खा सिंह भी चांदपुरी के जाने से काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि यह समाचार उनके लिए काफी दुख पहुंचाने वाला है। ब्रिगेडियर चांदपुरी के अदम्य साहस के चर्चे पूरे विश्व में हैं। वे मेरे काफी करीबी दोस्त और एक भाई की तरह थे। कुलदीप सिंह से पहले एथलेटिक्स एसोसिएशन की कमान मेरे पास थी। मैंने कुलदीप सिंह चंादपुरी को एसोसिशन का प्रधान बनाया था। वह काफी एक्टिव रहते थे।
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