वर्ष 2012 में अंडर-19 विश्वकप विजेता भारतीय टीम के कप्तान और दिल्ली रणजी टीम के खिलाड़ी उन्मुक्त चंद का इस समय पूरा फोकस भारतीय टीम में अपना स्थान पक्का करने का है। इसके लिए वह मैदान पर मेहनत भी कर रहे हैं। यह बातें उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कही।
राज्य के क्रिकेट खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मान्यता मिलने के बाद ही खिलाड़ियों का भविष्य चमकेगा। अब तक बोर्ड की मान्यता नहीं मिलना निराशाजनक है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह भविष्य में गृह जिले के युवा क्रिकेटरों की मदद करेंगे।
धारचूला के केएमवीएन गेस्टहाउस में अमर उजाला से बातचीत में पिथौरागढ़ के खड़कूभल्या गांव के मूल निवासी उन्मुक्त ने कहा कि वह इंडियन कैप पहनने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। रोज छह घंटे अभ्यास करते हैं, खानपान पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
जहां तक पिथौरागढ़ की बात है तो यहां खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्मुक्त का कहना था कि राज्य सरकार को खेल सुविधा बढ़ानी चाहिए, ताकि यहां के खिलाड़ियों को और अधिक से अधिक मौके मिल सकें। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह तीन महीने के रेस्ट पर हैं। अवकाश का समय गृह जिले में घूमने में बिताना चाहते हैं।
क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने बताया कि वह मुनस्यारी पहले आ चुके हैं। पंचाचूली ग्लेशियर का नाम काफी सुना है। बुधवार को वह फिल्मकार विनोद कापड़ी, प्रसिद्ध छायाकार अशोक पांडेय के साथ पंचाचूली बेस (दुग्तू) के लिए रवाना होंगे। पंचाचूली ग्लेशियर तक जाएंगे। बेस कैंप में चार दिन तक रहेंगे। धारचूला वापसी के बाद पिथौरागढ़ जाएंगे।