भारत की पुरुष बैडमिंटन टीम ने 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया को हराकर थॉमस कप का खिताब अपने नाम किया है। यह पहला मौका है, जब टीम इंडिया ने यह खिताब जीता है। इससे पहले कभी भी भारतीय टीम इस प्रतियोगिता के फाइनल में भी नहीं पहुंची थी। फाइनल में भारत ने इंडोनेशिया को 3-0 के अंतर से हराकर एक तरफा जीत दर्ज की और इतिहास रच दिया। इस खेल में भारत के उदय की शुरुआत प्रकाश पादुकोण के ऑल इंग्लैंड ओपन जीतने से हुई थी। इसके बाद भारतीय बैडमिंटन टीम ने इतिहास रचा है। यह पहला मौका है, जब टीम के रूप में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इससे पहले व्यक्तिगत रूप से कई खिलाड़ी बैडमिंटन में देश का नाम रोशन कर चुके हैं। यहां हम बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां बता रहे हैं।
1980 में प्रकाश पादुकोण ने ऑल इंग्लैंड ओपन जीता
2 of 8
प्रकाश पादुकोण
- फोटो : Social Media
साल 1980 में पहली बार किसी भारतीय ने बैडमिंटन कोर्ट पर अपना लोहा मनवाया था। प्रकाश पादुकोण ने 23 मार्च 1980 को इंग्लैंड के वेम्बली स्टेडियम में ऑल इंग्लैंड ओपन का खिताब अपने नाम किया था। 24 साल के प्रकाश यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। उनकी यह उपलब्धि पूरे देश के लिए हर मायने में खास थी। पहली बार भारत ने इस खेल में वैश्विक स्तर पर जीत का स्वाद चखा था। उन्होंने बिना कोई गेम हारे यह प्रतियोगिता अपने नाम की थी। फाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया के लिएम स्वी को 15-3, 15-10 के अंतर से मात दी थी।
2001 में पुलेला गोपीचंद ने दोहराया प्रकाश का कारनामा
3 of 8
पुलेला गोपीचंद
- फोटो : SELF
प्रकाश के ऑल इंग्लैंड ओपन जीतने के 21 साल बार फिर एक भारतीय ने यह खिताब अपने नाम किया। पुलेला गोपीचंद यह खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय बने थे। 11 मार्च 2001 को फाइनल मैच में उन्होंने चीन के चेन हॉन्ग को 15-12, 15-6 से हराकर यह खिताब जीता था। भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
2012 में साइना ने पहली बार ओलंपिक में पदक दिलाया
4 of 8
साइना नेहवाल
- फोटो : SOCIAL MEDIA
पूर्व नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने पहली बार ओलंपिक में भारत का परचम लहराया था। नेहवाल ने 2012 में हुए लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम किया था। वो पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी थीं, जिन्होंने ओलंपिक में कोई पदक जीता। इससे पहले 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक में साइना को क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन अपने ओलंपिक में उन्होंने देश को पदक दिलाया।
पीवी सिंधु ने 2016 और 2021 में बढ़ाया देश का मान
5 of 8
पीवी सिंधु
- फोटो : getty
साइना नेहवाल के बाद पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में देश का नाम ऊंचा करने की ठानी। साल 2016 में उन्होंने रियो ओलंपिक में देश को रजत पदक जिताया। इसके बाद 2021 में भी टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। इसके साथ ही वो पहली भारतीय महिला बन गईं, जिन्होंने लगातार दो ओलंपिक में पदक जीता। 2019 में सिंधु ने विश्व चैंपियनशिप भी जीती और यह कारनामा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। वो भी बैडमिंटन रैंकिंग में पहले स्थान पर रहीं। आने वाले समय में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।