{"_id":"5e6b75808ebc3ea4f0191c33","slug":"yoga-is-growing-worldwide-followers-are-increasing","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"देखा-देखी भी सध जाए योग, यह कोई क्रिया नहीं, बल्कि साधना है","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
देखा-देखी भी सध जाए योग, यह कोई क्रिया नहीं, बल्कि साधना है
तारिणी मोदी
Published by: योगेश जोशी
Updated Fri, 13 Mar 2020 05:31 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
दिसंबर 2014 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को योग दिवस मनाने की संस्तुति की। विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया कि योग अध्यात्म परंपरा का खास भाग है। यह कोई क्रिया नहीं, बल्कि साधना है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा तीनों एक हो जाते हैं। गीता में कहा गया है कि कर्मों में कुशलता योग से आती है।
2 of 5
एक ऐसे महायोगी भी हाल तक हमारे बीच रहे हैं, जिन्होंने योग से न केवल अपने समय के असाध्य समझे जाने वाले क्षय रोग यानी टीबी पर विजय प्राप्त की, अपितु वे 96 वर्ष तक जिए और आधिनुक योग के जनक भी कहलाए। वेल्लूर कृष्णमचार सुंदरराजा आयंगर के (संक्षेप में आयंगर) नाम से विश्व को भारतीय योग से परिचित कराने वाले योगी को ‘पद्मभूषण’ और ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित भी किया गया था।
3 of 5
14 दिसंबर, 1918 को मैसूर (अब कर्नाटक) में कोलार के वेल्लूर में जन्मे वी.के.एस. आयंगर को शुरू से ही मलेरिया, टायफॉइड और क्षय (टीबी) जैसे गंभीर रोगों की तकलीफ थी। इन्हीं बीमारियों के साथ उन्होंने जीवन के 16 वर्ष बिताए। सारे उपचार विफल होने के बाद 1934 में वे कृष्णमाचार्य नामक योगगुरु के पास गए और उनके पास रहकर योग सीखने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
योग साधना से आयंगर के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा और बीमारियां मिटने लगीं। शुरू में गुरु ने उन्हें उपेक्षित किया। आयंगर ने कठोर आसन आरंभ किए और सफल योग साधक के रूप में उभरे। आसनों के जरिए तनाव को राहत देने के लिए योग एक शक्तिशाली उपकरण माना जाता है। आयंगर योग में 200 योगासन और 14 प्राणायाम हैं।
विज्ञापन
5 of 5
आयंगर योग तीन प्रमुख तत्वों द्वारा योग की अन्य शैलियों से अलग है- तकनीक, क्रम और समय। उन्होंने ‘योगा प्रैक्टिसेस’, ‘फिलॉसफी लाइट ऑन योग’, ‘लाइट ऑन प्राणायाम’, ‘लाइट ऑन द योग सूत्र ऑफ पतंजलि’, ‘लाइट ऑफ लाइफ’ आदि पुस्तकों के रूप में एक विरासत दी है। दूसरे आसनों की तुलना में इन आसनों को देर तक करने पर ही शरीर को पूरी तरह से लाभ मिल सकता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।