महात्मा विदुर की गिनती महाभारत के बुद्धिजीवियों में की जाती थी। ये बहुत कुशाग्र बुद्धि, दूरदर्शी और सरल स्वाभाव के थे। महात्मा विदुर को धर्मराज का अवतार भी कहा जाता है। महात्मा विदुर पांडु और धृतराष्ट्र के भाई एवं पांडवों, कौरवों के काका थे। ये हर कार्य में कुशल और श्रेष्ठ थे परंतु इनका जन्म एक दासी के गर्भ से होने के कारण ये हस्तिनापुर राज्य के राजा नहीं बना पाए। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे। महाराज धृतराष्ट्र हर विषय पर विदुर जी से खुलकर चर्चा करते थे। कहा जाता है कि विदुर जी और महाराज धृतराष्ट्र के बीच का संवाद ही विदुर नीति के रूप में उपलब्ध है। आज के समय में भी विदुर जी की बताई गई नीतियां बहुत लाभप्रद और प्रासंगिक हैं। महात्मा विदुर ने विदुर नीति में कुछ गुणों के बारे में बताया गया है। जिन लोगों में ये गुण होते हैं उनका सदा कल्याण होता है और वे सदैव मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।
Vidur niti: ऐसे लोगों का सदैव होता है कल्याण, प्राप्त होती है सुख-शांति और मान-प्रतिष्ठा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Tue, 25 May 2021 08:30 AM IST
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