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अगर इन दो रातों में सो गए तो लक्ष्मी चली जाएंगी वापस

Wed, 28 Aug 2019 10:39 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Wed, 28 Aug 2019 10:39 AM IST
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importance of sharad purnima and diwali night

हम सभी ने शास्त्रों और पुराणों में पढ़ा है कि देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू है। इस कारण देवी लक्ष्मी रात के वक्त भ्रमण के लिए निकलती हैं। ऐसी मान्यता है कि पूरे साल में कुछ खास रातें होती हैं जब देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। इन रातों में दो मुख्य रात हैं। एक रात दीपावली की रात मानी जाती है तो दूसरी रात शरद पूर्णिमा की रात मानी जाती है। 



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पुराणों में बताया गया है कि धन की प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए दीपावली से ज्यादा महत्वपूर्ण शरद पूर्णिमा की रात है। इसी वजह से इस रात को कोजागरा यानी कौन जाग रहा है कि रात भी कहते हैं। 

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माना जाता है कि जो व्यक्ति इस रात में जागरण करके देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा अराधना करते हैं देवी लक्ष्मी उनका घर धन-धान्य से भर देती है।

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इस रात का इसलिए भी विशेष महत्व है क्योंकि राधा रूप में देवी लक्ष्मी और श्री कृष्ण रूप में भगवान विष्णु ने इसी रात को महारास किया था। इसलिए यह श्री कृष्ण और राधा की प्रिय रात है।

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ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात में चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपन्न होकर सबसे साफ और सुंदर दिखता है। इस रात को चन्द्रमा अमृत की वर्षा करता है। इसलिए रात में खीर बनाकर खुले आसमान में रखकर सुबह उसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है। कहते हैं इससे रोग मुक्ति होती है और व्यक्ति दीर्घायु होता है।

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