हमारे पौराणिक शास्त्रों में भव्य स्वर्ग लोक का वर्णन मिलता है जहां पुण्य आत्माएं कुछ काल के लिए रहती है। स्वर्ग वह जाता है जो पुण्य करने वाला है। वह वहां अपने पुण्यफल समाप्त होने तक रहता है। यहां अनंतकाल तक वही रहता है जिसने मोक्ष प्राप्त कर लिया हो। लेकिन चाणक्य नीति के अनुसार, कुछ लोगों को धरती में स्वर्ग लोक प्राप्त हो जाता है। इस बात को उन्होंने अपने इस श्लोक में कहा है।
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चाणक्य नीति के अनुसार ऐसे व्यक्ति को धरती में ही मिल जाता है स्वर्ग
Wed, 01 Jul 2020 10:36 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Wed, 01 Jul 2020 10:36 AM IST
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आचार्य चाणक्य
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आचार्य चाणक्य
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यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।।
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
जिसका पुत्र आज्ञाकारी होता है
चाणक्य नीति के अनुसार, जिस व्यक्ति का पुत्र आज्ञाकारी हो उस व्यक्ति का जीवन धन्य हो जाता है। उसे मानो धरती पर ही जीते-जी स्वर्गलोक मिल जाता है। आज्ञाकारी पुत्र अपने माता-पिता का मान-सम्मान करता है। समाज में उनका गौरव बढ़ाता है। वहीं जिस मां-बाप का पुत्र कपूत हो तो उनका जीवन नर्क बन जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जिसकी पत्नी उसकी इच्छा के अनुरूप व्यव्हार करती है
जिस व्यक्ति की पत्नी उनके इच्छानुरूप कार्य करती है उस व्यक्ति को भी स्वर्गलोक धरती में ही प्राप्त हो जाता है। आज्ञाकारी, पतिव्रता पत्नी अपने पति के ऊपर किसी भी तरह का संकट नहीं आने देती है, फिर चाहें वह काल ही क्यों न हो। वहीं इसके विपरीत यदि पत्नी अपने पति की आज्ञा को नहीं मानती है तो ऐसा घर शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जिसे अपने धन पर संतोष है
मनुष्य को अपनी आर्थिक स्थिति पर कभी भी संतोष नहीं होता है। ऐसे में उसका लालच बढ़ता है। धन कमाने की महत्वाकांक्षा उसके सामने सही गलत के भेद को मिटा देती है। लेकिन जिसे अपने धन पर संतोष हो, जो अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर संतुष्ट हो वह व्यक्ति बहुत ही खु़श होता है। उसे मानो स्वर्गलोक की प्राप्ति धरती में ही हो जाती है।
मनुष्य को अपनी आर्थिक स्थिति पर कभी भी संतोष नहीं होता है। ऐसे में उसका लालच बढ़ता है। धन कमाने की महत्वाकांक्षा उसके सामने सही गलत के भेद को मिटा देती है। लेकिन जिसे अपने धन पर संतोष हो, जो अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर संतुष्ट हो वह व्यक्ति बहुत ही खु़श होता है। उसे मानो स्वर्गलोक की प्राप्ति धरती में ही हो जाती है।