आचार्य चाणक्य की नीतियों का अनुसरण और अध्ययन आज भी किया जा रहा है। आचार्य चाणक्य ने शासन, प्रशासन और आम जीवन के लिए कई नीतियां बनाई हैं। अगर व्यक्ति आचार्य चाणक्य के द्वारा बनाई गई नीतियों का अनुसरण करें तो उसके जीवन में कभी भी किसी तरह के परेशानी नहीं होगी। चाणक्य की नीतियों ने चन्द्रगुप्त को राजा बनाने में अहम भूमिका निभाई है और उनकी बातें आज भी काफी मायने रखती हैं। चाणक्य ने संतान के बारें में भी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई हैं, अगली स्लाइड्स में जानते हैं वो बातें।
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चाणक्य निति: यदि ऐसी है संतान तो बर्बाद हो जाएगा घर, कुल और समाज में पिता के सम्मान को पहुंचेगी ठेस
Sat, 28 Dec 2019 01:27 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Sat, 28 Dec 2019 01:27 PM IST
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मान मर्यादा का नाश करता है कुपुत्र
- चाणक्य निति के अनुसार कुपुत्र कुल की मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा का नाश करता है। चाणक्य कहते है कि यदि कुल में कुपुत्र का जन्म हो जाता है तो पितरों का तर्पण करने वाला भी कोई नहीं रहता है, सबका नाश हो जाता है।
सदाचारी पुत्र है चंद्रमा के समान
- चाणक्य निति के अनुसार विद्वान पुत्र का होना परिवार के लिए हर्ष की बात है। चाणक्य कहते हैं कि एक विद्वान पुरुष चंद्रमा के समान है, जिस तरह अकेले चंद्रमा पूरी रात्रि में प्रकाश फैलता है ठीक वैसे ही सदाचारी पुत्र भी कुल में प्रकाश फैलता है जिस वजह से कुल का नाम और वर्चस्व बढ़ जाता है।
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आज्ञाकारी हो संतान
- चाणक्य निति के अनुसार संतान का आज्ञाकारी होना आवश्यक है। पुत्र अगर आज्ञाकरी है तो वो माता पिता को परेशान नहीं करेगा और उनकी आज्ञा का पालन करेगा।
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गलत आदतें हो अगर संतान में
- चाणक्य निति के अनुसार संतान में बुरी आदतें नहीं होनी चाहिए। ऐसी संतान माता पिता को परेशान करती है और कुल का नाम खराब करती है। बुरी आदतों वाला व्यक्ति सिर्फ अपने बारें में सोचता है, ऐसा व्यक्ति कभी भी अपने परिवार की मान मर्यादा का ध्यान नहीं रहता है।