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Narmada: आखिर उल्टी दिशा में क्यों बहती है नर्मदा नदी? जानें अधूरे प्रेम की पौराणिक कथा
Tue, 18 Feb 2025 11:02 AM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Tue, 18 Feb 2025 11:02 AM IST
सार
अधिकांश नदियां पश्चिम से पूर्व दिशा में बहती हैं, लेकिन नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होकर अरब सागर में मिलती है। आइए जानते हैं आखिर नर्मदा नदी उल्टी दिशा में क्यों बहती है...
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नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
- फोटो : Amar Ujala
Why Does Narmada Flow Reverse: देश में लगभग 400 नदियां हैं, जिनमें से कुछ को देवी के समान पूजनीय माना जाता है। इन पवित्र नदियों की विधिवत पूजा भी की जाती है। इनमें गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मदा जैसी कई नदियां शामिल हैं। ऐसे में नर्मदा को भी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। अधिकांश नदियां पश्चिम से पूर्व दिशा में बहती हैं, लेकिन नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होकर अरब सागर में मिलती है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर नर्मदा नदी उल्टी दिशा में क्यों बहती है?
नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
- फोटो : adobe stock
नर्मदा नदी की उत्पत्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार नर्मदा नदी भगवान शिव के शरीर से उत्पन्न हुई मानी जाती है, इसलिए इसे ‘शिव पुत्री’ या ‘शंकरी’ कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि इस नदी के किनारे पाए जाने वाले पत्थर शिवलिंग के आकार के होते हैं, जिन्हें ‘बाणलिंग’ कहा जाता है और यह हिंदू धर्म में अत्यधिक पूजनीय माने जाते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार नर्मदा नदी भगवान शिव के शरीर से उत्पन्न हुई मानी जाती है, इसलिए इसे ‘शिव पुत्री’ या ‘शंकरी’ कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि इस नदी के किनारे पाए जाने वाले पत्थर शिवलिंग के आकार के होते हैं, जिन्हें ‘बाणलिंग’ कहा जाता है और यह हिंदू धर्म में अत्यधिक पूजनीय माने जाते हैं।
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नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
- फोटो : adobe stock
एक कथा के अनुसार, भगवान शिव जब मैकल पर्वत पर तपस्या कर रहे थे, तब उनके शरीर से गिरी पसीने की बूंदों से एक सरोवर बना, जिससे एक सुंदर कन्या प्रकट हुई। देवताओं ने इस कन्या का नाम ‘नर्मदा’ रखा और तभी से इसे नर्मदा कहा जाने लगा।
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नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
- फोटो : adobe stock
नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
नर्मदा के विपरीत दिशा में बहने से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, नर्मदा राजा मेकल की पुत्री थीं। जब वे विवाह योग्य हुईं, तो राजा ने घोषणा की कि जो व्यक्ति गुलबकावली का फूल लाएगा, वही नर्मदा से विवाह कर सकेगा। राजकुमार सोनभद्र ने यह चुनौती पूरी की और उनके विवाह की तैयारी शुरू हो गई।
नर्मदा के विपरीत दिशा में बहने से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, नर्मदा राजा मेकल की पुत्री थीं। जब वे विवाह योग्य हुईं, तो राजा ने घोषणा की कि जो व्यक्ति गुलबकावली का फूल लाएगा, वही नर्मदा से विवाह कर सकेगा। राजकुमार सोनभद्र ने यह चुनौती पूरी की और उनके विवाह की तैयारी शुरू हो गई।
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नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
- फोटो : adobe stock
लेकिन विवाह से पहले नर्मदा ने राजकुमार को देखने की इच्छा जताई और अपनी सहेली जोहिला को संदेश लेकर भेजा। जब सोनभद्र ने जोहिला को देखा, तो उन्हें नर्मदा समझकर प्रेम प्रस्ताव रख दिया। जोहिला इस प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं कर सकीं और दोनों का प्रेम संबंध बन गया।
जब नर्मदा को इस बात का पता चला, तो वे क्रोधित हो गईं और जीवनभर अविवाहित रहने का संकल्प लिया। इसी नाराजगी में उन्होंने विपरीत दिशा में बहना शुरू कर दिया और अंततः अरब सागर में जाकर मिल गईं। तभी से नर्मदा को एक कुंवारी नदी के रूप में पूजा जाता है और इसके हर कंकड़ को ‘नर्वदेश्वर शिवलिंग’ कहा जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
जब नर्मदा को इस बात का पता चला, तो वे क्रोधित हो गईं और जीवनभर अविवाहित रहने का संकल्प लिया। इसी नाराजगी में उन्होंने विपरीत दिशा में बहना शुरू कर दिया और अंततः अरब सागर में जाकर मिल गईं। तभी से नर्मदा को एक कुंवारी नदी के रूप में पूजा जाता है और इसके हर कंकड़ को ‘नर्वदेश्वर शिवलिंग’ कहा जाता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।