रामायण में श्री राम के वन जाने का मुख्य कारण दासी मंथरा थी। वाल्मीकि की रामायण में भी मंथरा की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। लेकिन यह मंथरा कौन थी, जिसने दासी होते हुए भी अयोध्या नरेश के पूरे परिवार की गाथा बदल कर रख दी थी। इतना सब होने पर भी वह राज भवन में क्यों थी और रानी कैकेयी के साथ उसके होने की क्या वजह थी। जानते हैं इस बारे में..
2 of 4
भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
कैकेयी अश्वपति सम्राट की पुत्री थी। कैकेयी बहुत ही सुंदर, गुणी और वीरांगना स्त्री थी। इसीलिए वह राजा दशरथ को अपनी तोनों रानियों में सबसे ज्यादा प्रिय थी। कहा जाता है कि जब कैकेयी का विवाह राजा दशरथ से हुआ था तो दासी मंथरा मायके से उनके साथ आयी थी। जानते हैं कि मंथरा को कैकेयी अपने साथ क्यों लाईं थी और वह कौन थी।
3 of 4
भगवान राम प्रतीकात्मक तस्वीर
एक कथा के अनुसार राजा अश्वपति का एक भाई था, जिसका नाम वृहदश्व था। उसकी विशाल नैनों वाली एक बेटी रेखा थी, कैकेयी और रेखा बालपन से ही बहुत की अच्छी सखी थी। वह राजकन्या होने के साथ बहुत बुद्धिमति भी थी, परंतु बाल्यावस्था में ही एक रोग ने उसे घेर लिया जिसके कारण उसका पूरा शरीर पसीने में भीग जाता था, और वह प्यास के व्याकुल हो जाती थी। एक दिन प्यास से अत्यंत व्याकुल होने पर उसने इलायची, मिश्री और चंदन से बना हुआ शरबत पी लिया। उस शरबत को पीने से उसके शरीर के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया। आगे पढ़े..
4 of 4
प्रभु राम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
उसके पिता ने तुरंत चिकित्सकों से उपचार कराया। उपचार कराने से वह ठीक तो हो गई लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी में दोष आ गया जिसके कारण उसकी रीढ़ हमेशा के लिए टेढ़ी हो गई। यह कोई और नहीं बल्कि मंथरा ही थी। अपने इसी दोष के कारण वह अविवाहित थी, और कैकेयी के विवाह के समय मंथरा उनकी अंगरक्षिका बनकर अयोध्या आ गई।