बेहद सुंदर चमकीले चंद्रमा का हिन्दु धर्म में काफी महत्व है।चंद्रमा अन्य देवताओं के समान ही पूज्यनीय है। ज्योतिष में तो चंद्रमा का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। दिन-रात, महीना-साल, प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पूर्णिमा सब तिथियां चंद्रमा पर निर्भर करती हैं।
चंद्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई? क्या है धार्मिक महत्व
चंद्रमा की उतरती और चढ़ती कलाओं से ही तिथियों का, माह के कृष्ण और शुक्ल पक्षों का निर्धारण होता है।यहां तक की कुंडली भी चंद्रमा की दशा के अनुसार ही बनती है। जिस भाव में चंद्रमा होता है, उसी के अनुसार जातक की चंद्र राशि बनती है। वेदों में चन्द्र को मन का कारक कहा गया है।
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आज हम आपको पुराणों के आधार पर बताएंगे की चंद्रमा की उत्पति कैसे हुई?
अग्नि पुराण के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो सबसे पहले मानस पुत्रों को बनाया। उनमें से एक मानस पुत्र ऋषि अत्रि का विवाह ऋषि कर्दम की कन्या अनुसुइया से हुआ और चंद्रमा उन्हीं की संतान हैं।
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