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वाल्मीकि जयंती: रत्नाकर से महाकाव्य रामायण के रचयिता तक का सफर

Sun, 13 Oct 2019 08:26 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 13 Oct 2019 08:26 AM IST
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Valmiki Jayanti 2019  information about maharishi valmiki
वाल्मीकि जयंती 2019
आश्विनी माह की पूर्णिमा के दिन यानि 13 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती बड़े धूम धाम से मनाई जाएगी। हालांकि वाल्मीकि जयंती पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास से मनाई जाती है, परंतु उत्तर भारत में इस दिन का अपना अलग ही महत्त्व है। उत्तर भारत में वाल्मीकि जयंती को प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है।  आइए जानते है कि कैसे रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बने और रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना कर दी।






 
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क्यों मनाते है वाल्मीकि जयंती
त्रेता युग में जन्मे महर्षि वाल्मीकि की याद में इस दिन को वाल्मीकि जयंती के रूप में मनाया जाता है। महर्षि वाल्मीकि का पूरा जीवन बुरे कर्मों को त्यागकर अच्छे कर्मों और भक्ति की राह पर चलने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसी महान संदेश को लोगों तक पहुचाने के लिए वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर कई जगह शोभायात्रा भी निकाली जाती है और इस दिन उनके प्रतिमा स्थल पर भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। साथ ही विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से वाल्मीकि की कथा का प्रचार-प्रसार भी किया जाता है।
 
Valmiki Jayanti 2019  information about maharishi valmiki

वाल्मीकि की जीवन कहानी
वाल्मीकि जी के जन्म के संबंध में कहा जाता है कि वो कश्यप और अदिति के नौंवे पुत्र प्रचेता की पहली संतान हैं। उनकी माता का नाम चर्षणी और भाई का नाम भृगु था। कहा जाता है कि इन्हें बचपन में एक भील चुरा ले गया था जिससे इनका लालन-पालन भील प्रजाति में हुआ। इसी कारण, वह बड़े हो कर डाकू रत्नाकर बनें और उन्होनें जंगलों में अपना काफी समय व्यतीत किया। महर्षि वाल्मीकि वैदिक काल के महान ऋषि हैं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वाल्मीकि ने कठोर तप के पश्चात महर्षि पद प्राप्त किया था। महर्षि वाल्मीकि खगोल विद्या और ज्योतिष शास्त्र के भी प्रकांड पंडित थे।

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- फोटो : lord ram

महाकाव्य रामायण की रचना 
धार्मिक कथाओं के अनुसार एक पक्षी के वध पर जो श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से निकला था वह परमपिता ब्रह्मा जी की प्रेरणा से निकला था और यह बात स्वयं ब्रह्मा जी ने उन्हें बताई थी उसी के बाद ही उन्होने रामायण की रचना की थी। माना जाता है कि रामायण वैदिक जगत का सर्वप्रथम काव्य था।रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में की थी और जिसमें कुल चौबीस हजार श्लोक है।

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- फोटो : sita

कथाओं के अनुसार श्री राम के परित्याग के बाद महर्षि वाल्मीकि जी ने ही मां सीता को अपने आश्रम में पनाह दे कर उनकी रक्षा की थी और देवी सीता के दोनों पुत्रों लव और कुश को ज्ञान भी प्रदान किया था।

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