Vallabhacharya Jayanti 2021: एकादशी तिथि को मनाई जाती है वल्लभाचार्य जयंती, जानें इस दिन का महत्व
वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को वरूथिनी एकादशी के साथ ही श्री वल्लभ आचार्य जयंती भी मनाई जाती है। आचार्य वल्लभ एक दार्शनिक थे। इन्हें पुष्य संप्रदाय का संस्थापक माना जाता है। लोकप्रचलित मान्यातओं के अनुसार वल्लभाचार्य ही वे व्यक्ति थे जिन्हें श्रीनाथ जी के रूप में भगवान श्री कृष्ण से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ था। इन्हें अग्नि देवता का पुर्नजन्म माना जाता है। इस बार वल्लभाचार्य जयंती 07 मई 2021 को मनाई जाएगी। यह श्री वल्लभ आचार्य की 542वीं जन्म वर्षगांठ मनाई जाएगी। जानते हैं इस दिन का महत्व और मुहूर्त।
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी 07 मई 2021 दिन शुक्रवार
एकादशी तिथि आंरभ- 06 मई 2021 दिन गुरुवार दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 07 मई 2021 दिन शुक्रवार दोपहर 03 बजकर 32 मिनट तक
वल्लभ आचार्य जयंती उनके मानने वालों और भगवान श्री कृष्ण के भक्तों के द्वारा बहुत ही हर्षोल्लाल के साथ मनाया जाता है। लोग इस दिन श्री नाथ जी के मंदिर में जाकर विशेषतौर पर पूजा अर्चना करते हैं। तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, चेन्नई और महाराष्ट्र में इस दिन का बहुत महत्व माना जाता है। श्री वल्लभ आचार्य जी के द्वारा ही भगवान श्री कृष्ण को श्रीनाथ के रूप में पूजना प्रस्तुत किया गया था इसलिए श्री नाथ जी के मंदिर में इस दिन को बहुत ही उत्साह के साथ पर्व की तरह मनाया जाता है।
वल्लभ संप्रदाय वैष्णव संप्रदाय के अंतर्गत आता है। 16वीं शातब्दी में इस संप्रदाय की स्थापना वल्लभ आचार्य के द्वारा की गई थी। इस दिन श्रीनाथ जी के मंदिरों में प्रसाद चढ़ाया जाता है और वितरण भी किया जाता है। वल्लभ आचार्य जयंती एकादशी तिथि को पड़ती है इसलिए इस तिथि का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।