हिंदू धर्म में पूजा पाठ के दौरान फूलों का विशेष महत्व होता है। भगवान को कई प्रकार के फूल और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। हर एक फूल को भगवान को अर्पित करने का विशेष महत्व होता है। कुछ ऐसे भी फूल होते हैं, जिन्हें भूलकर भी भगवान को नहीं चढ़ाना चाहिए। कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ खास फूल कुछ खास भगवान को ही चढ़ाया जाता है। फूल चढ़ाने के कुछ नियम होते हैं, जिसका पालन हर इंसान को करना चाहिए। अगर गलती से भी गलत फूल भगवान को अर्पित कर दिया जाए, तो वे नाराज भी हो सकते हैं, जिसकी वजह से आपको पूजा में अशुभ फल मिल सकता है। ऐसे में पुष्प अर्पित करते समय आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं कुछ फूलों को चढ़ाने से घर में बरकत कम हो सकती है और क्लेश बढ़ सकता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
सूखे और बासी फूल
भगवान को फूल चढ़ाने का सबसे पहला नियम ही यही होता है कि फूल ताजे होने चाहिए। सूखे या बासी फूलों का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्याताओं के अनुसार इन फूलों का इस्तेमाल करने से आस पास नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सूखे और बासी फूलों को दान में दे सकते हैं या नदी में प्रवाहित कर सकते हैं।
सूर्य देव को अर्पित न करें ये फूल
शास्त्रों के अनुसार, सूर्य देव की पूजा के समय बेलपत्र का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान सूर्य नाराज हो जाते हैं, साथ ही उनकी कृपा भक्तों पर से हट जाती है।
अगस्त्य का फूल
मान्याताओं के अनुसार भगवान विष्णु जी को अगस्त्य का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा माधवी और लोध के फूलों का भी उपयोग करने से परहेज करें। ऐसा करने से पूजा का मनमुताबिक फल नहीं मिलता है।
कनेर का फूल
शिवजी को मदार और धतूरे के फूल पसंद हैं, अक्सर लोग यही फूल माता पार्वती को भी चढ़ा देते हैं। मगर मां पार्वती यानी आदिशक्ति की पूजा में भूलकर भी मदार के फूल नहीं अर्पित करना चाहिए। इससे माता पार्वती नाराज होती हैं और भक्तों पर से अपनी कृपा हटा लेती हैं।