Surya Grahan 2020 Date: 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है। इससे सूर्य की आंशिक या पूर्ण रोशनी धरती पर नहीं आ पाती है और इसी घटना को सूर्यग्रहण कहते हैं। जब सूर्य का कुछ हिस्सा ही ग्रहण के दौरान ढक जाता है तो उसे आंशिक या खंडग्रास ग्रहण कहते हैं और जब सूर्य पूरी तरह ढक जाता है और रोशनी चारों ओर से एक कंगन की तरह दिखने लगती है तो उसे कंकण सूर्यग्रहण या खग्रास कहते हैं।
Surya Grahan 2020: जानें क्या होता है कंकण सूर्यग्रहण, ग्रहण में इसलिए डाले जाते हैं तुलसी के पत्ते
वर्जित है भोजन करना
सनातन धर्म में ग्रहण कोई भी हो, चाहे सूर्य ग्रहण हो या फिर चंद्र और उसकी अवधि आधी हो या पूरी वह अशुभ मानी गई है। इसलिए ग्रहण के दौरान भोजन करने की सख्त मनाही है। स्कंद पुराण के अनुसार, यदि ग्रहण के समय किसी दूसरे व्यक्ति का भोजन किया जाता है तो मनुष्य के सारे पुण्य नष्ट हो जाते हैं। खगोलविदों और वैज्ञानिकों क कहना है कि ग्रहण के दौरान कुछ विकिरण वातावरण में मिलकर पृथ्वी पर पहुंचती हैं और ये विकिरण मनुष्य की सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। इससे बहुत जल्दी बने हुए भोजन में बैक्टीरिया पनपता है। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के बाद स्नान करके पवित्र होने के पश्चात ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। ग्रहण के समय भोजन करने से सूक्ष्म कीटाणुओं के पेट में जाने से रोग होने की आशंका रहती है,इसी कारण यह विधान बनाया गया है। अनेक शोधों से वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्रहण के समय मनुष्य की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है,जिसके कारण उस समय किया गया भोजन अपच,अजीर्ण आदि शिकायतें पैदा कर सकता है।
Surya Grahan 2020 : 21 जून को लगेगा सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक का समय और उपाय
इसलिए डाला जाता है कुश
हमारे ऋषि-मुनियों की मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान खाद्य वस्तुओं,जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं इसलिए इनमें कुश डाल दिया जाता है,ताकि कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। सूर्यग्रहण लगने के 12 घंटे पूर्व से ही उसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है।अंतरिक्षीय प्रदूषण के इस समय को सूतक काल कहा गया है। इसलिए हमारी भारतीय संस्कृति में सूतक काल और ग्रहण के समय में भोजन तथा पेय पदार्थों में कुश डालकर उन्हें ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचाने की बात कही गई है।
चूंकि ग्रहण से हमारी जीवन शक्ति कम होती है और तुलसीदल (पत्र) में विद्युत शक्ति व प्राणशक्ति सबसे अधिक होती है,इसलिए ग्रहणकाल के दौरान ग्रहण प्रदूषण को समाप्त करने के लिए भोजन तथा पेय सामग्री में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दिए जाते हैं, जिसके प्रभाव से न केवल भोज्य पदार्थ बल्कि अन्न,आटा,जल आदि भी प्रदूषण से मुक्त बने रहते है।