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Shradh 2021 Date: कब से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष, जानें तिथि, महत्व और कथा

Thu, 26 Aug 2021 06:24 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 26 Aug 2021 06:24 PM IST
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shradh 2021 date when is pitru paksha starting tithi shradh vidhi and significance
पितृ पक्ष 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

Pitru Paksha 2021 Start Dates: हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस वर्ष श्राद्ध 20 सितंबर से शुरू होकर 06 अक्तूबर तक चलेंगे। मान्यता है पितृगण हमारे लिए देवतुल्य होते हैं इस कारण से पितृ पक्ष में पितरों से संबंधित सभी तरह के कार्य करने पर वे हमें अपना आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है पितर के प्रसन्न होने पर देवतागण भी हमसे प्रसन्न होते हैं। पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का तर्पण नहीं करने हम पर पितृदोष लगता है। पितृ पक्ष का आरंभ आश्विन मास महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होता है जो आश्विन अमावस्या तिथि को समाप्त होता है। श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने से है। सनातन मान्यता के अनुसार जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। आइए जानते हैं पितृपक्ष 2021 की प्रमुख तिथियां, श्राद्ध से जुड़ी जानकारी और कथा के बारे में- 

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पितृ पक्ष 2021 - फोटो : अमर उजाला
श्राद्ध पक्ष 2021 की तिथियां
पूर्णिमा श्राद्ध - 20 सितंबर
प्रतिपदा श्राद्ध - 21 सितंबर 
द्वितीया श्राद्ध - 22 सितंबर 
तृतीया श्राद्ध - 23 सितंबर 
चतुर्थी श्राद्ध - 24 सितंबर 
पंचमी श्राद्ध - 25 सितंबर 
षष्ठी श्राद्ध - 27 सितंबर 
सप्तमी श्राद्ध - 28 सितंबर 
अष्टमी श्राद्ध- 29 सितंबर
नवमी श्राद्ध - 30 सितंबर 
दशमी श्राद्ध - 1 अक्तूबर 
एकादशी श्राद्ध - 2 अक्तूबर 
द्वादशी श्राद्ध- 3 अक्तूबर 
त्रयोदशी श्राद्ध - 4 अक्तूबर 
चतुर्दशी श्राद्ध- 5 अक्तूबर
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पितृ पक्ष 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
जब याद ना हो श्राद्ध की तिथि

पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण और उनकी पूजा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। जिस तिथि पर हमारे परिजनों की मृत्यु होती है उसे श्राद्ध की तिथि कहते हैं। बहुत से लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती ऐसी स्थिति में शास्त्रों में इसका भी निवारण बताया गया है।शास्त्रों के अनुसार यदि किसी को अपने पितरों के देहावसान की तिथि मालूम नहीं है तो ऐसी स्थिति में आश्विन अमावस्या को तर्पण किया जा सकता है। इसलिये इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इसके अलावा यदि किसी की अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। ऐसे ही पिता का श्राद्ध अष्टमी और माता का श्राद्ध नवमी तिथि को करने की मान्यता है।

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पितृ पक्ष 2021 - फोटो : अमर उजाला
क्या है पौराणिक कथा

कहा जाता है कि जब महाभारत के युद्ध में दानवीर कर्ण का निधन हो गया और उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंच गई, तो उन्हें नियमित भोजन की बजाय खाने के लिए सोना और गहने दिए गए। इस बात से निराश होकर कर्ण की आत्मा ने इंद्र देव से इसका कारण पूछा। तब इंद्र ने कर्ण को बताया कि आपने अपने पूरे जीवन में सोने के आभूषणों को दूसरों को दान किया लेकिन कभी भी अपने पूर्वजों को नहीं दिया। तब कर्ण ने उत्तर दिया कि वह अपने पूर्वजों के बारे में नहीं जानता है और उसे सुनने के बाद, भगवान इंद्र ने उसे 15 दिनों की अवधि के लिए पृथ्वी पर वापस जाने की अनुमति दी ताकि वह अपने पूर्वजों को भोजन दान कर सके। इसी 15 दिन की अवधि को पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है।

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