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Shani Amavasya : भाद्रपद माह में कुशोत्पाटिनी अमावस्या, जानें क्यों है ये अमावस्या इतनी खास

Sun, 03 Aug 2025 11:20 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 03 Aug 2025 11:20 AM IST
सार

Shani Amavasya 2025: 23 अगस्त 2025 को पड़ने वाली अमावस्या शनि अमावस्या होने से विशेष मानी जा रही है। यह दिन पितृ दोष, शनि साढ़ेसाती और जीवन की रुकावटें दूर करने के लिए शुभ अवसर है। शनि को प्रसन्न करने के लिए यह दिन पूजा-पाठ और दान के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा।

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Shani Amavasya 2025 Know Importance of Kushotpatini Amavasya in Bhadrapada Month
इस वर्ष 23 अगस्त 2025 को पड़ने वाली अमावस्या कई दृष्टियों से विशेष है। - फोटो : amarujala

Kushotpatini Amavasya date: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है, विशेष रूप से तब जब यह किसी शुभ वार के साथ संयोग बनाती है। हर माह की अमावस्या तिथि पितृ तर्पण, ध्यान, दान और शांति के कार्यों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन जब यह शनिवार को पड़े, तो इसे "शनि अमावस्या" कहा जाता है। यह तिथि शनि दोष, साढ़ेसाती और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने के लिए अत्यंत फलदायी होती है, साथ ही पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने का उत्तम समय भी मानी जाती है।


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इस वर्ष 23 अगस्त 2025 को पड़ने वाली अमावस्या कई दृष्टियों से विशेष है। यह भाद्रपद माह की अमावस्या है, जिसे कुश पितृणी अमावस्या भी कहते हैं, और इस बार यह शनिवार को पड़ रही है, जिससे इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ गया है। इस विशेष संयोग के कारण यह दिन पितृ दोष निवारण, शनि कृपा प्राप्ति और जीवन में सुख-शांति की कामना करने वालों के लिए एक बड़ा अवसर बन गया है। 
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Shani Amavasya 2025 Know Importance of Kushotpatini Amavasya in Bhadrapada Month
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर दिव्य ऊर्जा सक्रिय होती है - फोटो : adobe stock

भाद्रपद में कुशोत्पाटिनी अमावस्या का महत्व
भाद्रपद माह की अमावस्या को धर्मशास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। यह तिथि श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जाती है, जब पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, दान और मंत्रजप जैसे धार्मिक कार्य आरंभ होते हैं। इस दिन से विशेष रूप से कुशा नामक पवित्र घास को धार्मिक कार्यों के लिए भूमि से एकत्र किया जाता है, इसीलिए इसे कुश पितृणी अमावस्या भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर दिव्य ऊर्जा सक्रिय होती है और भगवान विष्णु ने इसी दिन कुशा को धार्मिक कर्मों के योग्य पवित्र किया था। यही कारण है कि श्राद्ध, यज्ञ और तप के कार्यों में इसी दिन तोड़ी गई कुशा का उपयोग विशेष फल देने वाला माना जाता है।

Shani Amavasya 2025 Know Importance of Kushotpatini Amavasya in Bhadrapada Month
शनिदेव को प्रसन्न करने और पितरों का आशीर्वाद पाने का यह उत्तम अवसर है। - फोटो : adobe stock

यह अमावस्या क्यों है खास?
इस वर्ष 23 अगस्त 2025 को पड़ने वाली कुश पितृणी अमावस्या विशेष इसलिए है क्योंकि यह शनिवार को आ रही है, जिससे यह शनि अमावस्या भी बन गई है। यह दिन शनि दोष, साढ़ेसाती और जीवन की रुकावटों को शांत करने के लिए अति शुभ माना जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने और पितरों का आशीर्वाद पाने का यह उत्तम अवसर है।

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Shani Amavasya 2025 Know Importance of Kushotpatini Amavasya in Bhadrapada Month
पितरों के लिए तर्पण करें और जरूरतमंदों को भोजन का दान दें। - फोटो : adobe stock

इस दिन क्या करें?

  • सूर्योदय से पहले स्नान कर शुद्ध भूमि से कुशा विधिपूर्वक एकत्र करें।
  • पितरों के लिए तर्पण करें और जरूरतमंदों को भोजन का दान दें।
  • शनिदेव को तिल के तेल से अभिषेक करें, पीपल वृक्ष की पूजा करें और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें।
  • काले तिल, काली वस्तुएं और तेल का दान करें, जिससे शनि की कृपा प्राप्त हो।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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