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इस मंदिर में जल चढ़ाने पर मिलता है एक करोड़ शिवलिंग की पूजा का फल

Thu, 09 Aug 2018 01:00 PM IST
धर्म डेस्क,अमर उजाला
धर्म डेस्क,अमर उजाला Updated Thu, 09 Aug 2018 01:00 PM IST
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sawan 2018 famous and ancient shiv temple in allahabad
श्रावण मास में देवों के देव महादेव की साधना का विशेष फल मिलता है। देश भर में शिव के कई ऐसे पावन तीर्थ स्थल हैं, जिसके दर्शन, पूजन से साधक को कई गुना फल मिलता है। इन्हीं में से एक है कोटेश्वर महादेव मंदिर।

 
sawan 2018 famous and ancient shiv temple in allahabad

भगवान राम ने प्रयाग में भी किया था शिव पूजन
भगवान श्री राम द्वारा न सिर्पâ रामेश्वरम में पार्थिव पूजन किया था बल्कि तीर्थराज में भी उन्होंने एक शिवलिंग स्थापित किया था। प्रयाग के संगम से कुछ दूर गंगा किनारे स्थित है भगवान शिव का यह पावन धाम। भगवान शिव को समर्पित यह तीर्थ कोटितीर्थ के नाम से भी जाना जाता है।

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भारद्वाज मुनि ने आशीर्वाद देने से किया था मना
भगवान राम जब लंका पर विजय प्राप्त करके वापस लौटते समय प्रयाग पहुंचे तो उन्होंने भारद्वाज मुनि से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लेने की अनुमति मांगी लेकिन भारद्वाज मुनि ने उनको आशीर्वाद देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने ब्रह्म हत्या की है।

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ऐसे मिला पाप से मुक्ति का उपाय
तब भगवान राम ने इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। इस पर भारद्वाज मुनि ने उन्हें प्रयाग के उत्तर में गंगा नदी के किनारे एक करोड़ शिवलिंग स्थापित करने को कहा। इस पर भगवान श्री राम ने भारद्वाज मुनि से एक करोड़ शिवलिंग बनाए जाने के बाद उसकी निरंतर पूजन आदि की चिंता जताई। तब भारद्वाज मुनि ने कहा, मां गंगा के रेत का एक कण एक शिवलिंग के बराबर है, इसलिए आप गंगा के रेत से शिवलिंग बनाएं।
 
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गंगा की रेत से बनाया था शिवलिंग
इस प्रकार भगवान श्रीराम ने गंगा की रेत से शिवलिंग बनाकर पूजन किया और उसके बाद पापमुक्त होकर भारद्वाज मुनि का आशीर्वाद प्राप्त किया। भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित इस शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि इसमें एक पुष्प, एक लोटा जल आदि चढ़ाने से एक करोड़ गुना फल प्राप्त होता है। भगवान शिव के इस मंदिर के नाम पर न मंदिर क्षेत्र का नाम शिवकुटी पड़ा। सावन के महीने में यहां पर बड़ा मेला लगता है। जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पर दर्शन करने आते हैं।

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