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sankashti chaturthi 2021: इस दिन पड़ रही है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी, जानिए महत्व तिथि और पूजा विधि
Mon, 15 Mar 2021 11:43 AM IST
Shashi Shashi
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Published by: Shashi Shashi
Updated Mon, 15 Mar 2021 11:43 AM IST
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गणेश जी
हिंदी कैलंडर के अनुसार पूरे वर्ष में 13 सकंष्टी चतुर्थी के व्रत किए जाते हैं। इस माह संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 मार्च 2021 दिन बुधवार को किया जाएगा। इसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को समर्पित किया जाता है। इस दिन लोग बुद्धि और शुभता के देव भगवान गणेश का व्रत और पूजन करते हैं। इस दिन नियम और निष्ठा के साथ पूजन करने से व्यक्ति के कार्यों में आने वाली विघ्न बाधाएं दूर होती हैं। तो चलिए जानते हैं कि संकष्टी चतुर्थी शुभ मूहुर्त, महत्व और पूजा विधि।
गणेश जी
संकष्टी चतुर्थी व्रत तिथि आरंभ एवं समाप्ति समय
चतुर्थी तिथि आरंभ- 31 मार्च 2021 दिन बुधवार दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त- 01 मार्च 2021 दिन बृहस्पतिवार सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर
चतुर्थी तिथि आरंभ- 31 मार्च 2021 दिन बुधवार दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त- 01 मार्च 2021 दिन बृहस्पतिवार सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर
संकष्टी चतुर्थी महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर)
संकष्टी चतुर्थी महत्व
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ होता है, सभी संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश सभी देवों में सर्वप्रथम माना गया है। किसी भी मांगलिक कार्य को करने से भगवान गणेश की पूजन किया जाता है क्योंकि इनका पूजन करने से कार्य बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर व्रत और पूजन करने से भक्त की मनोकामना पूर्ति होती है। यह व्रत विशेष तौर पर माताएं अपनी संतान की उन्नति के लिए करती हैं।
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ होता है, सभी संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश सभी देवों में सर्वप्रथम माना गया है। किसी भी मांगलिक कार्य को करने से भगवान गणेश की पूजन किया जाता है क्योंकि इनका पूजन करने से कार्य बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर व्रत और पूजन करने से भक्त की मनोकामना पूर्ति होती है। यह व्रत विशेष तौर पर माताएं अपनी संतान की उन्नति के लिए करती हैं।
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गणेश जी
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि-
- संकष्टी चतुर्थी को प्रातःकाल उठकर स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान गणेश के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें।
- गणेश जी को पुष्प, अक्षत, पंचामृत और दूर्वा अर्पित करें।
- गणेश जी को बूंदी के लड्डू या मोदक का भोग लगाएं।
- इसके बाद गणेश जी की आरती करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत के महातम्य की कथा पढ़े या श्रवण (सुने) करें।
- पूरे दिन व्रत करने के पश्चात रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।