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Putrada Ekadashi 2021 Date: कब है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और कथा

Mon, 16 Aug 2021 06:57 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 16 Aug 2021 06:57 AM IST
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putrada ekadashi 2021 date tithi when is shravan vrat puja vidhi shubh muhurat
पुत्रदा एकादशी व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला

Putrada Ekadashi 2021 in August: श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत 18 अगस्त बुधवार को रखा जाएगा। सावन के महीने में पड़ने वाली एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। साल में दोबार पुत्रदा एकादशी आती है, पौष मास में भी पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता पड़ता है। मान्यता है कि श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत करने से वाजपेयी यज्ञ के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है, जिन लोगों की संतान नहीं है उन लोगों के लिए यह व्रत शुभफलदायी है। भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। अगर संतान को किसी प्रकार का कष्ट है तो भी यह व्रत रखने से सारे कष्ट दूर होते हैं। संतान दीर्घायु होती है। जो लोग पूरी श्रद्धा के साथ पुत्रदा एकादशी व्रत के महत्व और कथा को पढ़ता या श्रवण करता है। उसे कई गायों के दान के बराबर फल की प्राप्ति होती है। समस्त पापों का नाश हो जाता है। 

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पुत्रदा एकादशी व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला।

पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ- 18 अगस्त 2021 को 03:20 एएम
एकादशी तिथि समाप्त- 19 अगस्त 2021 को 01:05 एएम
पुत्रदा एकादशी व्रतपारण (व्रत तोड़ने का) समय- 19 अगस्त 2021 को 06:32 एएम से 08:29 एएम तक

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पुत्रदा एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत विधि
  • दशमी को भोजन के बाद अच्छी तरह से दातून करना चाहिए ताकि अन्न का अंश मुंह में न रहे। 
  • एकादशी के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प कर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए। 
  • इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन, रात को दीपदान करना चाहिए। 
  • एकादशी की सारी रात भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना चाहिए। 
  • श्री हरि विष्णु से अनजाने में हुई भूल या पाप के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। 
  • अगली सुबह पुनः भगवान विष्णु की पूजा कर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। 
  • भोजन के बाद ब्राह्मण को क्षमता के अनुसार दान देकर विदा करना चाहिए।
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पुत्रदा एकादशी व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला
पवित्रा एकादशी की कथा
प्राचीन काल में एक नगर में राजा महिजीत राज करते थे। निःसंतान होने के कारण राजा अक्सर बहुत दुःखी रहते थे। मंत्रियों से राजा का दुःख देखा नहीं गया और वह लोमश ऋषि के पास गये। ऋषि से राजा के निःसंतान होने का कारण और उपाय पूछा। लोमश ऋषि ने बताया कि पूर्व जन्म में राजा को एकादशी के दिन भूखा प्यासा रहना पड़ा। पानी की तलाश में एक सरोवर पर पहुंचे तो एक गाय वहां पानी पीने आ गई। राजा ने गाय को भगा दिया और स्वयं पानी पीकर प्यास बुझाई। इससे अनजाने में एकादशी का व्रत हो गया और गाय के भगान के कारण राजा को निःसंतान रहना पड़ रहा है। लोमश ऋषि ने मंत्रियों से कहा कि अगर आप लोग चाहते हैं कि राजा को पुत्र की प्राप्ति हो तो श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत रखें और द्वादशी के दिन अपना व्रत राजा को दान कर दें। मंत्रियों ने ऋषि के बताए विधि के अनुसार व्रत किया और व्रत का दान कर दिया। इससे राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई। इस कारण पवित्रा एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है।
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