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Pradosh Vrat March 2021: महाशिवरात्रि से एक दिन पहले है प्रदोष व्रत, जानें महत्व शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Tue, 02 Mar 2021 04:25 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 02 Mar 2021 04:25 PM IST
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Pradosh vrat March 2021 date shubh muhurat importance and vrat puja vidhi
pradosh vrat

हर माह त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस बार मार्च माह का पहला प्रदोष व्रत 10 मार्च 2021 दिन बुधवार यानि महाशिवरात्रि के एक दिन पहले रखा जाएगा। मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा। इसके अगले दिन 11 मार्च को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि की तरह प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। इस व्रत को करने से भगवान शिव अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं। प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि पड़ने की वजह से शिव भक्तों को लिए ये दो दिन बहुत ही खास रहेंगे। तो चलिए जानते हैं प्रदोष व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

Pradosh vrat March 2021 date shubh muhurat importance and vrat puja vidhi
पार्वती और शिव - फोटो : google
प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त-


प्रदोष व्रत तिथि- 10 मार्च 2021 दिन बुधवार


फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी आरम्भ– 10 मार्च 2021 दिन बुधवार को दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से


फाल्गुन त्रयोदशी तिथि समाप्त– 11 मार्च 2021 दिन गुरूवार को 02 बजकर 39 मिनट पर

Pradosh vrat March 2021 date shubh muhurat importance and vrat puja vidhi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
प्रदोष व्रत महत्व-

पौराणिक मान्यता के अनुसार सबसे पहले प्रदोष व्रत को चंद्रदेव ने रखा था। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्ति प्राप्त हुई थी। माना जाता है कि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।

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Pradosh vrat March 2021 date shubh muhurat importance and vrat puja vidhi
शिव पार्वती
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानि सूर्यास्त से पौने घंटे यानि 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। 
  • त्रयोदशी तिथि पर प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात भगवान शिव की पूजा करें। 
  • पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को प्रदोष काल में पूजा करने के लिए बैठें। 
  • भगवान शिव और माता पार्वती के सामने धूप-दीप प्रज्वलित करें।
  • भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं।
  • उन्हें पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। 

इसके साथ ही सुहागन महिलाओं को मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाना चाहिए।

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