हिंदू सनातन धर्म में कलश स्थापना का बहुत महत्व माना गया है किसी भी शुभ कार्य विवाह, गृहप्रवेश आदि में कलश पूजन किया जाता है। 17 अक्तूबर से नवरात्रि आरंभ होने वाली हैं। नवरात्रि में मां के नौ स्वरुपों की चौकी सजाकर पूजा की जाती है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के पूजन के साथ घटस्थापना करने का प्रावधान है। मां की चौकी लगाते समय घटस्थापना अवश्य की जाती है। इसके लिए मिट्टी का कुंभ, तांबे या फिर चांदी का लोटा लिया जाता है। उसके ऊपर स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है और नारियल स्थापित किया जाता है। विधि-विधान के साथ पूजन करके कलश स्थापित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि कलश क्यों स्थापित किया जाता है, स्वास्तिक और नारियल लगाने का क्या महत्व है। मिट्टी या बालू की वेदी बनाकर जौ बोने के पीछे क्या है मान्यता...
Navratri 2020: नवरात्रि पर क्यों स्थापित किया जाता है कलश, क्या है इसमें जल भरने और जौ बोने का महत्व
कलश स्थापना का महत्व
कलश मध्य स्थान से गोलाकार और मुख छोटा होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलश के मुख में विष्णु, कंठ में महेश और मूल में सृष्टि के रचियता ब्रह्मा जी का स्थान माना गया है। कलश के मध्य स्थान में मातृशक्तियों का स्थान माना गया है। कलश को तीर्थो का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। एक तरह से कलश स्थापना करते समय विशेष तौर पर देवी-देवताओं का एक जगह आवाह्न किया जाता है।
कलश में क्यों भरा जाता है जल
शास्त्रों के अनुसार खाली कुंभ को अशुभ माना गया है। इसलिए कलश में जल भरकर रखा जाता है। भरे हुए कलश को संपन्नता का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है जल भरे हुए कलश को घर में रखने से संपन्नता आती है। कलश में भरा गया जल मन का कारक माना गया है, कलश के पवित्र जल की तरह हमारा मन भी स्वच्छ और निर्मल बना रहे। ताकि मन में किसी प्रकार की घृणा, क्रोध और मोह की भावना का कोई स्थान न हो।
कलश स्थापित करते समय कलश के जल में दूर्वा, सुपारी और अक्षत आदि डाले जाते हैं। उसके ऊपर आम के पत्ते लगाए जाते हैं इसके पीछे का कारण है कि दूर्वा में संजीवनी के गुण, सुपारी जैसे स्थिरता के गुण, पुष्प के उमंग और उल्लास के गुण आदि हमारे अंदर समाहित हो जाएं।
कलश पर नारियल रखने का महत्व
कलश के ऊपर लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेटकर रखा जाता है। नारियल को गणेश जी का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। जिस तरह से सभी कार्यों में गणेश जी का पूजन किया जाता है उसी तरह से पूजा में सबसे पहले कलश पूजन होता है। नारियल पूजन से पूजा पूर्ण मानी जाती है।