फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   mahashivratri 2021 date why belpatra is offered to lord shiva know the story

Mahashivratri 2021: भगवान शिव को क्यों इतने प्रिय हैं बिल्वपत्र, जानिए इससे जुड़ी कथा

Wed, 10 Mar 2021 03:34 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Wed, 10 Mar 2021 03:34 PM IST
विज्ञापन
mahashivratri 2021 date why belpatra is offered to lord shiva know the story
महाशिवरात्रि 2021 बिल्वपत्र से जुड़ी आवश्यक बातें (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

महाशिवरात्रि भगवान शिव को मनाने के लिए बहुत ही विशेष दिन माना जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च 2021 दिन गुरूवार को पड़ रहा है। इस दिन भक्त शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते हैं। भगवान शिव की प्रिय चीजों में बिल्वपत्र को सबसे प्रिय माना गया है। बिल्वपत्र के बिना भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव मात्र एक बिल्वपत्र और एक लोटा जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि पर मंदिरों में शिवलिंग पूरी तरह से बिल्वपत्रों से ढक जाती है। माना जाता है कि बिल्वपत्र अर्पित करने से भगवान शिव सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर भगवान शिव को बिल्वपत्र इतने प्रिय क्यों हैं।

विज्ञापन

mahashivratri 2021 date why belpatra is offered to lord shiva know the story
बिल्वपत्र की तीन पत्तियों का महत्व और कथा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

बिल्वपत्र की तीन पत्तियों का महत्व
बिल्वपत्र या बेलपत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं। इन पत्तियों को अलग-अलग मत हैं। बिल्वपत्र की तीन पत्तियों को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा कई लोग इसे त्रिशूल और भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक भी मानते हैं। 

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से जुड़ी पौराणिक कथा
जब अमृत प्राप्ति के लिए देवों और दानवों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया तो सबसे पहला जल यानि हलाहल विष प्राप्त हुआ। विष का प्रभाव इतना तेज था कि सभी देव और दानव उससे जलने लगे। विष के प्रभाव से सारी सृष्टि का विनाश हो सकता था, परंतु किसी में भी विष को सहन करने की क्षमता नहीं थी, जिसके बाद सभी भगवान शिव के पास गए। सृष्टि से बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया। विष के प्रभाव से शिव जी का गला नीला पड़ गया और उनका शरीर तपने लगा। तब शिव जी के शरीर को शीतल रखने के लिए गंगा जल से अभिषेक करने के साथ देवी-देवताओं ने शिव जी को बिल्वपत्र खिलाए, जिसके प्रभाव से शिव जी के शरीर की तपन कम होने लगी। मान्यता है कि तभी से शिव जी को बिल्वपत्र बहुत प्रिय हैं। यही कारण है कि जब भक्त भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करते हैं तो वे अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बिल्वपत्र चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • भगवान शिव को बिल्वपत्र चढ़ाने से पहले उन्हें भलिभांति धोने के बाद गंगाजल से शुद्ध कर लें।
  • शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करे से पहले देख लें कि वह कहीं से भी कटा-फटा न हो।
  • शिव जी को केवल बिल्वपत्र अर्पित न करें इसके साथ ही जल अवश्य चढ़ाएं।
  • शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों का बिल्वपत्र ही चढ़ाना चाहिए खंडित बिल्वपत्र मान्य नहीं होता है।
  • भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए बिल्वपत्र अर्पित करते समय उनके पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का उच्चारण भी करते रहना चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed