Mahashivratri 2021: भगवान शिव को क्यों इतने प्रिय हैं बिल्वपत्र, जानिए इससे जुड़ी कथा
महाशिवरात्रि भगवान शिव को मनाने के लिए बहुत ही विशेष दिन माना जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च 2021 दिन गुरूवार को पड़ रहा है। इस दिन भक्त शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते हैं। भगवान शिव की प्रिय चीजों में बिल्वपत्र को सबसे प्रिय माना गया है। बिल्वपत्र के बिना भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव मात्र एक बिल्वपत्र और एक लोटा जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि पर मंदिरों में शिवलिंग पूरी तरह से बिल्वपत्रों से ढक जाती है। माना जाता है कि बिल्वपत्र अर्पित करने से भगवान शिव सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर भगवान शिव को बिल्वपत्र इतने प्रिय क्यों हैं।
बिल्वपत्र की तीन पत्तियों का महत्व
बिल्वपत्र या बेलपत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं। इन पत्तियों को अलग-अलग मत हैं। बिल्वपत्र की तीन पत्तियों को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा कई लोग इसे त्रिशूल और भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक भी मानते हैं।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से जुड़ी पौराणिक कथा
जब अमृत प्राप्ति के लिए देवों और दानवों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया तो सबसे पहला जल यानि हलाहल विष प्राप्त हुआ। विष का प्रभाव इतना तेज था कि सभी देव और दानव उससे जलने लगे। विष के प्रभाव से सारी सृष्टि का विनाश हो सकता था, परंतु किसी में भी विष को सहन करने की क्षमता नहीं थी, जिसके बाद सभी भगवान शिव के पास गए। सृष्टि से बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया। विष के प्रभाव से शिव जी का गला नीला पड़ गया और उनका शरीर तपने लगा। तब शिव जी के शरीर को शीतल रखने के लिए गंगा जल से अभिषेक करने के साथ देवी-देवताओं ने शिव जी को बिल्वपत्र खिलाए, जिसके प्रभाव से शिव जी के शरीर की तपन कम होने लगी। मान्यता है कि तभी से शिव जी को बिल्वपत्र बहुत प्रिय हैं। यही कारण है कि जब भक्त भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करते हैं तो वे अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
बिल्वपत्र चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- भगवान शिव को बिल्वपत्र चढ़ाने से पहले उन्हें भलिभांति धोने के बाद गंगाजल से शुद्ध कर लें।
- शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करे से पहले देख लें कि वह कहीं से भी कटा-फटा न हो।
- शिव जी को केवल बिल्वपत्र अर्पित न करें इसके साथ ही जल अवश्य चढ़ाएं।
- शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों का बिल्वपत्र ही चढ़ाना चाहिए खंडित बिल्वपत्र मान्य नहीं होता है।
- भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए बिल्वपत्र अर्पित करते समय उनके पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का उच्चारण भी करते रहना चाहिए।