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Mahashivratri 2020: जन्म-मृत्यु से परे भोले भंडारी की उत्पत्ति कैसे हुई?

Mon, 17 Feb 2020 04:16 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 17 Feb 2020 04:16 PM IST
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Mahashivratri 2020 birth story of lord shiv
mallikarjun jyotirling

महाशिवरात्रि का पर्व शुक्रवार, 21 फरवरी 2020 को है। वैसे तो हर महीने शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन, फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। शिवभक्तों के लिए यह त्योहार बहुत महत्व रखता है। महाशिवरात्रि पर मंदिरों और शिवालयों में भारी भीड़ एकत्रित होती है। आखिरकार भगवान शिव में ऐसा क्या है? जो उत्तर में कैलाश से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम् तक वे एक जैसे पूजे जाते हैं। उनके व्यक्तित्व में कौन सा चुंबक है जिस कारण समाज के भद्रलोक से लेकर शोषित, वंचित, भिखारी तक उन्हें अपना मानते हैं? वे क्यों सर्वहारा के देवता हैं? शिव का व्यक्तित्व विशाल है। वे काल से परे महाकाल है। सर्वव्यापी हैं, सर्वग्राही हैं। सिर्फ भक्तों के नहीं देवताओं के भी संकटमोचक हैं। इस महाशिवरात्रि के मौके पर आइए जानते हैं  जन्म और मृत्यु से परे भोले भंडारी की उत्पत्ति कैसे हुई?

Mahashivratri 2020 birth story of lord shiv
सत्य के शिव - फोटो : shiv temple

हमारे शास्त्रों में भगवान शिव को संहारक का दर्जा मिला हुआ है। हर कोई शिव भक्त इस बात को जानना चाहता है कि आखिर भगवान शंकर का जन्म कैसा हुआ और इनके माता-पिता का क्या नाम है। अलग-अलग पुराणों में भगवान शिव के जन्म और उनके माता-पिता के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के मुताबिक भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है यानि इनकी उत्पत्ति स्वंय हुई हैं। भोलेनाथ जन्म और मृत्यु से परे हैं।

Mahashivratri 2020 birth story of lord shiv
सत्य के शिव - फोटो : shiv temple

विष्णु पुराण में भगवान शिव के जन्म के संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार एक बार ब्रह्रमा जी को एक बच्चे की जरुरत थी तब उन्होंने इसके लिए तपस्या की। तभी अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका नाम ‘ब्रह्मा’ नहीं है इसलिए वह रो रहा है। तब ब्रह्मा ने शिव का नाम रूद्र रखा जिसका अर्थ होता है रोने वाला।

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सत्य के शिव - फोटो : shiv temple
शिव के ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने के पीछे भी विष्णु पुराण में एक पौराणिक कथा है। इसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न था तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सिवा कोई भी देव या प्राणी नहीं था। तब केवल विष्णु ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे। तब उनकी नाभि से कमल नाल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए।
  
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सत्य के शिव - फोटो : shiv temple

जब ये दोनो देव सृष्टि के संबंध में बातें कर रहे थे तो शिव जी प्रकट हुए। ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया।

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