अक्सर लोगों के मन में चलता रहता है कि इस दुनिया को छोड़ने बाद उन्हें स्वर्ग नसीब होगा या फिर नरक में जाना पड़ेगा। इसका जवाब आज से कई हजारों वर्ष पूर्व महात्मा बुद्ध ने दे दिया था। उन्होंने इसे जानने के लिए एक आसान सा तरीका बताया।
महात्मा बुद्ध की इस बात से जानिए स्वर्ग मिलेगा या नरक
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अपने पिता की मृत्यु से दुखी एक युवक उनकी आत्मा को मुक्त कराने के लिए महात्मा बुद्ध के पास गया। इस आशा के साथ कि वे कोई न कोई उपाय जरूर करेंगे। युवक की बात सुनकर महात्मा बुद्ध ने उसे एक कलश में पिता की अस्थियां और दूसरे में पत्थर भर लाने को कहा। इसके बाद बुद्ध ने दोनों कलश को नदी में इस तरह रखने को कहा कि वे पानी में मुहाने तक डूब जाए।
बुद्ध ने युवक से कहा कि वह पुरोहितों के मंत्र पढ़ने के दौरान दोनों कलश को पानी के भीतर हथौड़ी से ठोकें और वापस आकर सारा किस्सा सुनाएं। पूरी क्रिया करने के बाद युवक अत्यंत उत्साह में बुद्ध के पास आकर पूरा किस्सा सुनाया कि दोनों कलश पानी के भीतर ठोकने पर टूट गए। उनके भीतर मौजूद पत्थर तो पानी में डूब गए, लेकिन घी ऊपर आ गया और नदी में दूर तक बह गया।
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बुद्ध ने कहा कि अब तुम जाकर पुरोहितों से कहो कि वे प्रार्थना करें कि पत्थर पानी के ऊपर आकर तैरने लगें और घी डूब जाए। यह सुनकर युवक चकित रह गया और बुद्ध से बोला कि आप कैसी बात कर रहे हैं? पुरोहित कितनी ही प्रार्थना क्यों न कर लें, लेकिन पत्थर पानी पर कभी नहीं तैरेंगे और घी कभी नहीं डूबेगा।
तब महात्मा बुद्ध ने कहा कि तुम्हारे पिता के साथ भी ऐसा ही होगा। यदि उन्होंने अपने जीवन में शुभ और सत्कर्म किए होंगे, तो उनकी आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होगी। यदि उन्होंने त्याज्य और स्वार्थपूर्ण कर्म किए होंगे, तो उनकी आत्मा नर्क में जाएगी। सृष्टि में ऐसा कोई भी पुरोहित या कर्मकांड नहीं है, जो तुम्हारे पिता के कर्मफलों में तिल भर का भी हेरफेर कर सके।
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