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Kartik Month 2025: कार्तिक माह में इस चालीसा का नियमित पाठ करें और श्रीहरि की कृपा पाएं

Wed, 08 Oct 2025 11:15 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 08 Oct 2025 11:15 AM IST
सार

Tulsi Chalisa Path: कार्तिक का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यदि आप भगवान विष्णु की कृपा पाने  के लिए तुलसी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।

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Kartik 2025 Daily Chalisa Recitation to Gain the Blessings of Lord Shrihari
तुलसी चालीसा पाठ - फोटो : अमर उजाला

Tulsi Chalisa Lyrics in Hindi : कार्तिक मास हिंदू पंचांग का आठवां महीना होता है, जिसे भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना के लिए समर्पित माना जाता है। इस माह में श्रद्धालु पूरे मन से विष्णु भगवान की उपासना करते हैं और उनके आशीर्वाद पाने की कामना करते हैं। कार्तिक का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।


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तुलसी के पौधे को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय माना जाता है और तुलसी के बिना भगवान का भोग अधूरा माना जाता है। इसलिए कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। यदि आप भगवान विष्णु की कृपा पाने के इच्छुक हैं, तो तुलसी पूजा के समय तुलसी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। इससे भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
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Kartik 2025 Daily Chalisa Recitation to Gain the Blessings of Lord Shrihari
तुलसी चालीसा - फोटो : amar ujala

तुलसी चालीसा

श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।


नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।


नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।


करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यह लेख  धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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