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Ekadashi 2021: 23 अप्रैल को है कामदा एकादशी, पूरे नियम के साथ करेंगे व्रत पारण, तभी मिलेगा एकादशी का पूर्ण फल

Mon, 19 Apr 2021 07:27 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 19 Apr 2021 07:27 PM IST
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Kamda Ekadashi 2021 date importance niyam know the rules of ekadashi vrat and parna
एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

प्रत्येक माह में दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार 23 अप्रैल 2021 को कामदा एकादशी का व्रत किया जाएगा। एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की कृपा से सभी सुखों की प्राप्ति होती है लेकिन यह व्रत अत्यंत कठिन होता है। ज्यादातर लोगों को एकादशी के पूरे नियमों के बारे में सही से जानकारी नहीं होती है। इसे पूर्णतया नियमों के साथ करना बहुत आवश्यक होता है तभी व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत रखने से लेकर पारण तक सभी नियमों के साथ व्रत करना चाहिए। जानते हैं एकादशी व्रत रखने और पारण के नियम।

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एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : (demo pic)

एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि यानि एकादशी से एक दिन पहले आरंभ हो जातें हैं और व्रत का पारण (उपवास पूर्ण करना) द्वादशी तिथि यानि एकादशी के अगले दिन किया जाता है। जिस दिन एकादशी हो उससे एक दिन पहले यानि दशमी के दिन रात्रि भोजन का त्याग किया जाता है। इसके बाद एकादशी पर प्रातः उठकर स्नानादि करने के बाद पूजा करें और पूरे दिन-रात निराहार रहकर व्रत करें। इसके बाद द्वादशी यानि अगले दिन प्रात:काल उठकर स्नानादि करके पूजन करने के बाद किसी ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद को भोजन करवाकर पारण (व्रत खोला) किया जाता है।

 

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एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

द्वादशी समाप्त होने से पहले शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण कर लें, बाद व्रत का पारण नहीं किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि के बाद व्रत का पारण करना पाप के समान माना जाता है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तब उस स्थिति में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।

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एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu
जानिए क्या होता है हरि वासर

जिस तरह द्वादशी के बाद व्रत का पारण नहीं किया जाता है उसी तरह से हरि वासर समाप्त होने से पहले एकादशी व्रत का पारण नहीं करते हैं। द्वादशी तिथि लगने के बाद उसकी पहली एक चौथाई अवधि को हरि वासर कहते हैं। जब द्वादशी तिथि की प्रथम एक चौथाई अवधि बीत जाए यानि हरि वासर समाप्त हो जाए तभी शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।

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एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
 व्रत खोलने सबसे उत्तम समय

एकादशी व्रत खोलने का सबसे उत्तम समय प्रात:काल माना गया है। हरि वासर समाप्त हो जाने के बाद सुबह ही स्नान ध्यान करने के बाद व्रत खोल लें। यदि किसी कारणवश सुबह व्रत न खोल पाएं तो दोपहर में व्रत न खोलें। मध्यान्ह बीत जाने के बाद व्रत का पारण करें।

 

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