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Janaki Jayanti 2021: इस दिन हुआ था माता सीता का प्राकट्य, जानें तिथि महत्व और पूजा विधि

Fri, 26 Feb 2021 06:49 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 26 Feb 2021 06:49 PM IST
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Janaki Jayanti 2021 know the date significance and vrat puja vidhi of sita ashtami
janki jayanti - फोटो : janki jayanti

फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जनक दुलारी, राम प्रिया माता सीता का प्राकट्य हुआ था। इसे सीता अष्टमी भी कहा जाता है। इस बार जानकी जयंती 06 मार्च 2021 दिन शनिवार को पड़ रही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार जब राजा जनक हल से धरती जोत रहे थे। तभी उनका हल किसी कठोर चीज से स्पर्श हुआ जब राजा जनक ने देखा तो वहां से उन्हें एक कलश प्राप्त हुआ। उस कलश में एक सुंदर कन्या थी। राजा जनक के कोई संतान नहीं थी, वे उस कन्या को अपने साथ ले आए। इस कन्या का नाम ही सीता रखा गया। राजा जनक की जेयष्ठ पुत्री होने के कारण ये जनक दुलारी कहलायीं। माता सीता को लक्ष्मी जी का ही स्वरूप माना जाता है। जानकी जयंती के दिन दिन माता सीता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। तो चलिए जानते हैं जानकी जयंती का महत्व और पूजा विधि...

Janaki Jayanti 2021 know the date significance and vrat puja vidhi of sita ashtami
राम सीता

जानकी जयंती 2021 तिथि मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 05 मार्च 2021 दिन शुक्रवार शाम 07 बजकर 54 मिनट से 
फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी समाप्त- 06 मार्च 2021 दिन शनिवार शाम 06 बजकर 10 मिनट पर

Janaki Jayanti 2021 know the date significance and vrat puja vidhi of sita ashtami
Ram Sita

जानकी जयंती या सीता अष्टमी का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सीता जयंती का व्रत करने से वैवाहिक जीवन से जुड़े सभी कष्टों का नाश होता है। इसके साथ ही पति की आयु लंबी होती है। सुहागन महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत मायने रखता है। इसके साथ ही इस दिन कुंवारी लड़कियां भी मनचाहे वर के लिए व्रत करती हैं। यदि किसी कन्या के विवाह में बाधा आ रही हो तो इस व्रत को करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं।

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राम सीता

सीता अष्टमी व्रत पूजा विधि-

  • सीता अष्टमी के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर माता सीता और भगवान श्रीराम के समक्ष व्रत का संकल्प करें।
  • सबसे पहले भगवान गणेश और माता अंबिका की पूजा करें। 
  • इसके बाद माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा आरंभ करें।
  • माता सीता को पीले फूल, पीले वस्त्र और सोलह श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
  • माता सीता को भोग में पीली चीजें अर्पित करें।
  • विधिपूर्वक पूजा के बाद मां सीता की आरती करें।
  • दूध और गुड़ से व्यंजन बनाकर प्रसाद चढ़ाएं और वितरित करें।
  • पूजन करने के पश्चात माता जानकी के इस मंत्र का एक माला जाप करें। 

''रामाभ्यां नमः मंत्र'' 

  • शाम को पुनः पूजन करने के पश्चात जो दूध और गुड़े के बने व्यंजन से व्रत का पारण करें।
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