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Jal Jhulni Ekadashi 2022: इस दिन है जलझूलनी एकादशी का व्रत, जानें महत्व और पूजा विधि

Sat, 03 Sep 2022 05:21 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 03 Sep 2022 05:21 PM IST
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Jal Jhulni Ekadashi 2022 Know the Date Time And Shubh Muhurat of Jaljhulani ekadashi vrat
जलझूलनी एकादशी व्रत का महत्व - फोटो : अमर उजाला

Jal Jhulni Ekadashi 2022 Date: प्रत्येक वर्ष शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एकादशी व्रत रखा जाता है। साल में पड़ने वाली इन एकादशी को विभिन्न नाम से जाना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी और डोल ग्यारस भी कहते हैं। इस बार जलझूलनी एकादशी का व्रत 06 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। इस एकदशी व्रत को दौरान भी भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना होती है। जल झूलनी एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की अर्चना की जाती है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक परिवर्तिनी एकादशी या जलझूलनी एकादशी पर व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं।आइए जानते हैं कि जलझूलनी एकादशी कब है, इसका महत्व और पूजा विधि के बारे में। 

Jal Jhulni Ekadashi 2022 Know the Date Time And Shubh Muhurat of Jaljhulani ekadashi vrat
जलझूलनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

जलझूलनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ- सितम्बर 06, 2022, मंगलवार, प्रातः 05:54 से  
एकादशी तिथि समाप्त -सितम्बर 07, 2022, बुधवार प्रातः 03:04 बजे
जलझूलनी/परिवर्तिनी एकादशी पारण समय- 8 सितम्बर, गुरुवार, प्रातः 06:02 से 08:33 तक  

Jal Jhulni Ekadashi 2022 Know the Date Time And Shubh Muhurat of Jaljhulani ekadashi vrat
इस दिन है जलझूलनी एकादशी का व्रत

जलझूलनी एकादशी का महत्व 
स्कन्द पुराण के अनुसार चातुर्मास के दौरान जब श्री विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, उसके बाद जलझूलनी एकादशी के दिन वह सोते हुए करवट बदलते हैं।  पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस एकादशी व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। कहते हैं भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं इस व्रत का माहात्म्य युधिष्ठिर को बताया है। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता यह भी है को जो भक्त भाद्रपद शुक्ल एकादशी का व्रत और पूजन करते हैं, उन्हें ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों में पूजन का फल प्राप्त होता है। 

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Jal Jhulni Ekadashi 2022 Know the Date Time And Shubh Muhurat of Jaljhulani ekadashi vrat
जलझूलनी एकादशी की व्रत विधि

व्रत विधि

  • परिवर्तिनी/जलझूलनी एकादशी व्रत के नियम का पालन दशमी तिथि की रात्रि से ही आरंभ कर देना चाहिए।
  • एकादशी के दिनप्रातः स्नानआदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और इसके बाद भगवान वामन की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके बाद भगवान वामन की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद भगवान वामन की पूजा विधि-विधान से करें 
  • सबसे पहले भगवान वामन को पंचामृत से स्नान कराएं। 
  • स्नान कराने के बाद उनके चरणामृत को व्रती अपने और परिवार के सभी सदस्यों पर छिड़के और उस चरणामृत को पिए।
  • इसके बाद वामन देव को पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करे। 
  • इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें और भगवान वामन की कथा सुनें।
  • द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
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