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मंगलवार यानी हनुमान जी का दिन: जानिए हनुमान जी की लंका यात्रा की कुछ रोचक बातें

Tue, 23 Aug 2016 10:49 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली। Updated Tue, 23 Aug 2016 10:49 AM IST
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hanuman lanka yatra story
हनुमानजी
देवी सीता की खोज करने के ल‌िए हनुमान जी अपनी वानर सेना को लेकर चले। लेक‌िन केवल हनुमान जी ही देवी सीता तक पहुंचने में सफल हुए और इस कार्य में हनुमान जी के सामने यह 8 चुनौत‌ियां सामने आई।

हनुमान जी की लंका यात्रा की यह 8 बातें स‌िर्फ हनुमान जी के परमभक्त ही जानते हैं आपको क‌ितना पता है

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हनुमान जी

वानर सह‌ित हनुमान जी जब सागर तट पर पहुंचे तो सागर पार करने का कोई उपाय जब समझ में नहीं आया तब सभी वानर सह‌ित हनुमान जी ने अन्न जल त्यागक देह त्याग का व‌िचार करते हैं क्योक‌ि सभी ने व‌िचार क‌िया क‌ि खानी हाथ लौटने से अच्छा है प्राण त्याग द‌िए जाएं।

हनुमान जी की लंका यात्रा की यह 8 बातें स‌िर्फ हनुमान जी के परमभक्त ही जानते हैं आपको क‌ितना पता है

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हनुमान जी
जब हनुमान सह‌ित सभी वानर न‌िराश होकर बैठ गए तब जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्त‌ि और सामर्थ्य की याद द‌िलाई और कहा क‌ि तुम इतने पराक्रमी हो क‌ि बचपन में ही सूर्य को न‌िगल गए थे तब यह समुद्र तुम्हारे ल‌िए क्या है तुम इस समुद्र को पल भर में पार कर जाओ। इतना सुनते ही हनुमान जी को शाप के कारण भूली शक्त‌ि याद आ गई और हनुमान जी ने अपने शरीर का आकार बढ़ते हुए आकाश को छू ल‌िया। बाल्म‌िकी रामायण के अनुसार हनुमान जी के शरीर का व‌िस्तार 10 योजन था।
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हनुमान जी
हनुमान जी ने जब अपने शरीर का व‌िस्तार क‌िया और समुद्र पार करने के ल‌िए जैसे ही छलांक लगाई आस-पास के पेड़ उखड़ गए और हवा के वेग से ऐसे उड़े जैसे वह भी हनुमान जी के साथ सागर पार कर जाएंगे।
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हनुमान जी
समुद्र पार करते समय बीच में एक पल के ल‌िए हनुमान जी मैनाक पर्वत पर रुके थे क्यों मैनाक ने हनुमान जी की सेवा में प्रकट होकर सेवा का अवसर देने की प्रार्थना की थी लेक‌िन भगवान राम के काम में देरी न हो इसल‌िए हनुमान जी ने मैनाक का सम्मान रखते हुए एक पल को पर्वत पर अपना पांव रखा और आगे बढ़ गए।
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