Hajj Yatra 2022: इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक मुसलमानों की सबसे पवित्र हज यात्रा आज यानी 06 जून 2022 दिन सोमवार से शुरू हो रही है। मुस्लिम धर्म के लोगों के लिए हज यात्रा बेहद जरूरी मानी जाती है। ये इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। इस्लाम धर्म में मान्यता है कि अल्लाह की मेहर पाने के लिए जीवन में एक बार हज यात्रा पर जाना बेहद जरूरी है। जिस प्रकार मुसलमान नमाज और रोजे अदा करके अल्लाह की मेहर पता है, ठीक इसी प्रकार वह हज यात्रा को भी अहमियत देता है। हज यात्रा को पूरा करके वह मुसलमान होने का फर्ज अदा करता है और अपने जन्म को सफल मानता है। हज यात्रा के प्रति प्रत्येक इस्लामिक अनुयायी की गहरी धार्मिक भावना जुड़ी होती है। पूरे दुनिया से हज अदा करने के लिए मुसलमान सऊदी अरब के मक्का शहर में एकत्र होते हैं। वहां हज यात्री कई दिन तक रहते हैं और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं को निभाते हैं। ऐसे में चलिए आज जानते हैं हज यात्रा के बारे में सबकुछ....
Hajj Yatra 2022: सऊदी अरब जाकर 'शैतान को पत्थर' क्यों मारते हैं मुसलमान? जानिए हज यात्रा से जुड़ी जरूरी बातें
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हज यात्रा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। इस्लाम में 5 स्तंभ हैं- कलमा पढ़ना, नमाज पढ़ना, रोजा रखना, जकात देना और हज पर जाना।
हज यात्रा से जुड़ी जरूरी बातें
हज में पुरुष सफेद रंग का लिबास और महिलाएं ऐसे कपड़े पहनती हैं, जिनमें उनके मुंह को छोड़कर पूरा शरीर ढक जाए। इसके अलावा यात्रियों को परफ्यूम लगाने, नाखून काटने या बाल और दाढ़ी काटने की भी मनाही होती है। साथ ही हज यात्रा के दौरान यात्रियों को झगड़ने या बहस करने की इजाजत नहीं होती।
हज करने वाले लोगों को सबसे पहले काबा शरीफ के चारों ओर सात बार घूमना होता है। काबा वो इमारत है, जिसकी ओर मुंह करके मुसलमान नमाज पढ़ते हैं। काबा को अल्लाह का घर भी कहा जाता है।
शैतान को पत्थर क्यों मारते हैं मुसलमान?
हज यात्रा के दौरान किए जाने वाले रश्मों में से एक है शैतान को पत्थर मारना। मुस्लिमों के सबसे बड़े तीर्थ स्थल सऊदी अरब के पास मक्का के करीब स्थित रमीज मारात में शैतान को पत्थर मारने की रश्म आज भी चली आ रही है।