Ganesh Chaturthi 2022 Ganesh Stotra: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस दिन से गणेश उत्सव की शुरुआत होती है, जो कि दस दिन तक चलता है। इस दौरान पूजा पंडालों और घर पर गणपति बप्पा को विराजित किया जाता है। साथ ही उनकी विधि पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। वहीं दसवें दिन उननकी प्रतिमा का विर्सजन किया जाता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। गणपति बप्पा की कृपा पाने के लिए गणेश चतुर्थी पर गणेश स्त्रोत का पाठ जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि इससे सभी कष्ट और पीड़ा से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यता है कि सबसे पहले इस स्त्रोत का पाठ नारद जी ने किया था। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर सुख, समृद्धि और सौभाग्य के दाता गणपति की पूजा में इस स्त्रोत का पाठ जरूर करें। चलिए जानते हैं गणेश स्त्रोत पाठ और इससे जुड़े नियम के बारे में...
Ganesh Stotra: गणेश चतुर्थी पर करें इस स्त्रोत का पाठ, हर मनोकामना होगी पूरी
गणेश स्त्रोत पाठ
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
गणेश स्त्रोत का पाठ करने की विधि
गणेश चतुर्थी के दिन गणेश स्त्रोत का पाठ करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। भगवान को लाल फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, फल, मोदक, लड्डू, पान, सुपारी और दूर्वा आदि अर्पित करें। इसके बाद गणेश स्रोत का पाठ शुरू करें। मान्यता के अनुसार, इस स्त्रोत का पाठ 5, 7, 11 या 108 बार किया जा सकता है। ध्यान रहे कि पाठ का उच्चारण सही तरीके से करें।
गणेश चतुर्थी तिथि, शुभ महूर्त और योग
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 30 अगस्त 2022 को दोपहर के 03 बजकर 34 मिनट पर होगी। ये तिथि 31 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट पर खत्म हो जाएगी।