Abujh Muhurat: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास वर्ष का बारहवां और अंतिम महीना होता है। यह महीना न केवल नववर्ष के समापन का प्रतीक है, बल्कि प्राकृतिक, वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय ऋतु परिवर्तन होता है, शीत ऋतु धीरे-धीरे विदा लेती है और वसंत की ताजगी हर तरफ महसूस होने लगती है। वातावरण में नई ऊर्जा और उमंग का संचार होता है, जो मन और शरीर दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
फाल्गुन मास में कब हैं विवाह के अबूझ मुहूर्त? इन 12 दिनों में बिना मुहूर्त होगी शादी
Phulera Dooj: फाल्गुन मास 2026 प्राकृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दौरान होली और महाशिवरात्रि का आयोजन होता है, जो आनंद, उत्साह और आध्यात्मिक शांति का संदेश देते हैं। यह समय नए उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
फाल्गुन में शादी का अबूझ मुहूर्त
फाल्गुन मास के आरंभ होते ही शहर के मंदिरों में भगवान के सामने पूरे माह फागोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पारंपरिक ढोल-चंग की धुनों के साथ होली के गीत गाए जाएंगे और वातावरण में उल्लास का माहौल रहेगा। फाल्गुन में शादी के लिए कुल 12 सावे होते हैं, जिनमें से 19 फरवरी को फुलेरा दूज का अबूझ सावा भी शामिल है। यही दिन विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस महीने महाशिवरात्रि का पर्व भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसके बाद होली के दूसरे दिन हिंदू नववर्ष, यानी चैत्र मास का शुभारंभ होता है। होलिका दहन 2 मार्च को होगा, और इससे लगभग 8 दिन पहले लगने वाला होलाष्टक अवधि के कारण इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
फाल्गुन महीने का नाम कैसे पड़ा?
फाल्गुन मास इस साल 2 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च 2026 को समाप्त होगा। इस महीने की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित होता है, इसलिए इस महीने का नाम फाल्गुन पड़ा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। फाल्गुन मास न केवल प्राकृतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से भी यह अपने आप में विशेष महत्व रखता है।
फाल्गुन मास में में 12 मुहूर्त /सावे
|
तिथि |
दिन |
विशेष विवरण |
|
5 फरवरी, 2026 |
गुरुवार |
मुहूर्त /सावा |
|
6 फरवरी, 2026 |
शुक्रवार |
मुहूर्त /सावा |
|
8 फरवरी, 2026 |
रविवार |
मुहूर्त /सावा |
|
10 फरवरी, 2026 |
मंगलवार |
मुहूर्त /सावा |
|
12 फरवरी, 2026 |
गुरुवार |
मुहूर्त /सावा |
|
14 फरवरी, 2026 |
शनिवार |
मुहूर्त /सावा |
|
19 फरवरी, 2026 |
गुरुवार |
फुलेरा दूज (अबूझ मुहूर्त /सावा) |
|
20 फरवरी, 2026 |
शुक्रवार |
मुहूर्त /सावा |
|
21 फरवरी, 2026 |
शनिवार |
मुहूर्त /सावा |
|
24 फरवरी, 2026 |
मंगलवार |
मुहूर्त /सावा |
|
25 फरवरी, 2026 |
बुधवार |
मुहूर्त /सावा |
|
26 फरवरी, 2026 |
गुरुवार |
मुहूर्त /सावा |
खरमास और चातुर्मास 2026
साल 2026 में खरमास 14 मार्च को शुरू होगा, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा, और यह अवधि 13 अप्रैल 2026 तक रहेगी। इस समय के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। खरमास के समाप्त होने के बाद विवाह का मौसम पुनः शुरू होगा और चातुर्मास के प्रारंभ तक चलती रहेगी।
इस साल ज्येष्ठ मास में अधिकमास (17 मई से 15 जून) होने के कारण पहले महीने में भी शादी-ब्याह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जा सकेंगे। चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी तक चलता है। देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और उसके साथ ही सभी शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को पड़ेगी। इसका अर्थ है कि 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी विवाह या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जा सकते।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।