फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Dev Uthani Ekadashi 2019: क्यों मानी जाती है देवउठनी एकादशी सबसे खास, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Mon, 04 Nov 2019 08:57 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 04 Nov 2019 08:57 AM IST
विज्ञापन
dev uthani ekadashi 2019 importance significance puja vidhi tulsi puja and tulsi shaligram vivah

हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक शुक्ल एकादशी को देव जागरण का पर्व माना गया है,इस दिन श्री हरि जाग जाते हैं। इस पावन तिथि को देवउठनी ग्यारस या देव प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह एकादशी 8 नवंबर को है। चार महीने से विराम लगे हुए मांगलिक कार्य भी इसी दिन से शुरू हो जाते हैं।विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक भयंकर राक्षस का वध किया था और फिर आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे हरिशयनी एकादशी कहते हैं,को क्षीर सागर में श्री हरि ने शेषनाग की शय्या पर शयन किया। चार मास की योग निद्रा त्यागने के बाद भगवान विष्णु के जागने का तात्पर्य है कि चार मास में स्वाध्याय,पूजा-अर्चना से अर्जित ऊर्जा को हम सत्कर्मों में बदल दें ताकि हमारे सद्गुणों का प्रभाव हमारे जीवन में दिखें।

dev uthani ekadashi 2019 importance significance puja vidhi tulsi puja and tulsi shaligram vivah

पंचभीका व्रत
कार्तिक पंच तीर्थ महास्नान भी इसी दिन से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है।पूरे महीने कार्तिक स्नान करने वालों के लिए एकादशी तिथि से 'पंचभीका व्रत' का प्रारम्भ होता है,जो पांच दिन तक निराहार (निर्जला) रहकर किया जाता है। यह धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है। पदम् पुराण में वर्णित एकादशी महात्यम के अनुसार देवोत्थान एकादशी व्रत का फल एक हज़ार अश्वमेघ यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ के बराबर होता है। एकादशी तिथि का उपवास बुद्धिमान,शांति प्रदाता व संततिदायक है।इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्त्व है।इस व्रत को करने से जन्म-जन्मांतर के पाप क्षीण हो जाते हैं तथा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

dev uthani ekadashi 2019 importance significance puja vidhi tulsi puja and tulsi shaligram vivah
देव उठनी पर पूजा विधि
इस दिन सांयकाल में पूजा स्थल को साफ़-सुथरा कर लें,चूना व गेरू से श्री हरि के जागरण के स्वागत में रंगोली बनाएं। घी के ग्यारह दीपक देवताओं के निमित्त जलाएं।द्राक्ष,ईख,अनार,केला,सिंघाड़ा,लड्डू,पतासे,मूली आदि ऋतुफल एवं नवीन धान्य इत्यादि पूजा सामग्री के साथ रखें। यह सब श्रद्धापूर्वक श्री हरि को अर्पण करने से उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
dev uthani ekadashi 2019 importance significance puja vidhi tulsi puja and tulsi shaligram vivah
मंत्रोच्चारण
इस दिन मंत्रोच्चारण,स्त्रोत पाठ,शंख घंटा ध्वनि एवं भजन-कीर्तन द्वारा देवों को जगाने का विधान है।भगवान को जगाने के लिए इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए-
उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव। गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥
शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।

मंत्र ज्ञात नहीं होने पर या शुद्ध उच्चारण नहीं होने पर 'उठो देवा,बैठो देवा' कहकर श्री नारायण को उठाएं। श्रीहरि को जगाने के पश्चात उनकी षोडशोपचारविधि से पूजा करें। सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए प्रभु का चरणामृत अवश्य ग्रहण करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चरणामृत सभी रोगों का नाश कर अकाल मृत्यु से रक्षा करता है,सभी कष्टों का निवारण करता है। देवोत्थनी एकादशी के दिन विष्णु स्तुति,शालिग्राम व तुलसी महिमा का पाठ व व्रत रखना चाहिए।विष्णु पुराण के अनुसार किसी भी कारण से चाहे लोभ के वशीभूत होकर या मोह के कारण जो एकादशी तिथि को भगवान विष्णु का अभिनंदन करते है वे समस्त दुखों से मुक्त होकर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।
   
 
विज्ञापन
dev uthani ekadashi 2019 importance significance puja vidhi tulsi puja and tulsi shaligram vivah

आखिर सोते-जागते क्यों हैं श्री हरि
एक बार भगवान विष्णु से उनकी प्रिया लक्ष्मी जी ने आग्रह भाव में कहा-हे प्रभु!आप दिन-रात जागते हैं लेकिन,जब आप सोते हैं तो फिर कई वर्षों के लिए सो जाते हैं।ऐसे में समस्त प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है।इसलिए आप नियम से ही विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ समय आराम मिलेगा। लक्ष्मी जी की बात सुनकर नारायण मुस्कुराए और बोले-'देवी'!तुमने उचित कहा है। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें मेरी सेवा में रहने के कारण विश्राम नहीं मिलता है। इसलिए आज से मैं हर वर्ष चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूँगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और योगनिद्रा कहलाएगी जो मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे,मैं उनके घर तुम्हारे सहित सदैव निवास करूँगा।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed