Chhath Puja 2020: छठ महापर्व का समापन आज, जानें मुहूर्त और पारण विधि
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छठ महापर्व का समापन 21 नवंबर को है। कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को इस महापर्व का समापन होता है। इस दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। चार दिन के इस महापर्व में पहला दिन नहाय-खाय का होता है। दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का, और चौथे और अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सुबह उगते हुए सूर्य को पानी में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद छठ का व्रत रखने वाली महिलाएं सात बार परिक्रमा करती हैं और अंत में प्रसाद खाकर व्रत का पारण करती हैं।
सप्तमी तिथि - 21 नवंबर 2020
सूर्योदय सुबह - 06:49 बजे
सूर्यास्त शाम - 05:25 बजे
सूर्य को जल देने के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल चन्दन, चावल, लाल फूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पुष्पांजलि अर्पित करना चाहिए। इस समय अपनी दृष्टि को कलश की धारा वाले किनारे पर रखेंगे तो सूर्य का प्रतिबिम्ब एक छोटे बिंदु के रूप में दिखाई देगा, एवं एकाग्रमन से देखने पर सप्तरंगों का वलय नजर आएगा। अर्घ्य के बाद सूर्यदेव को नमस्कार कर परिक्रमा करें।
छठ पूजा का धार्मिक महत्व
छठ सूर्य देव और छठी माई की उपासना का महापर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान के सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। आस्था का यह महापर्व छठ, सूर्य व्रत, उषा पूजा, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी के नाम से जाना जाता है।