Chaturthi Shradh Kab Hai 2025: पितृपक्ष जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, सनातन धर्म में एक अत्यंत पुण्यकाल माना जाता है। यह अवधि उन पूर्वजों को समर्पित होती है जो इस लोक से परलोक गमन कर चुके हैं। ऐसा विश्वास है कि पितृ पक्ष के दौरान विधिपूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। हर दिन किसी न किसी तिथि के अनुसार विशेष श्राद्ध होता है, जो पितरों की मृत्यु तिथि के आधार पर किया जाता है।
Chaturthi Shradh 2025: चतुर्थी तिथि का श्राद्ध कब करें, 10 या 11 सितंबर? जानिए सही तिथि, दिन और शुभ समय
Chaturthi Shraddh 2025: चतुर्थी श्राद्ध की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि अलग-अलग पंचांग 10 और 11 सितंबर दोनों को यह तिथि बता रहे हैं। ऐसे में सही दिन पर श्राद्ध करना आवश्यक हो जाता है, ताकि विधि-विधान का पालन ठीक से हो और पूर्वजों को संतोष मिले।
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चतुर्थी श्राद्ध 2025 कब है?
इस साल चतुर्थी श्राद्ध बुधवार, 10 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह तिथि तीसरे श्राद्ध के साथ ही पड़ रही है, इसी वजह से लोगों में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है 10 सितंबर 2025 को दोपहर 03:37 बजे, और इसका समापन 11 सितंबर 2025 को दोपहर 12:45 बजे होगा।
चतुर्थी श्राद्ध 2025 का शुभ मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त: प्रातः 11:53 से दोपहर 12:43 तक
कुल अवधि- 50 मिनट
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:43 से दोपहर 01:33 तक
कुल अवधि- 50 मिनट
अपराह्न काल मुहूर्त: दोपहर 01:33 से सायं 04:02 तक
कुल अवधि -2 घंटे 30 मिनट
पितृ पक्ष के चौथे दिन किसका श्राद्ध किया जाता है?
पितृ पक्ष हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण समय होता है, जब लोग अपने पितरों यानी पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। पितृ पक्ष में प्रत्येक तिथि किसी विशेष श्राद्ध के लिए निर्धारित होती है।
पितृ पक्ष के चौथे दिन, यानी चतुर्थी तिथि को उन दिवंगत आत्माओं का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन किसी भी मास की चतुर्थी तिथि को हुआ हो चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो या शुक्ल पक्ष की। इस दिन किया गया श्राद्ध "चतुर्थी श्राद्ध" या "चौथ श्राद्ध" के नाम से जाना जाता है।
चतुर्थी श्राद्ध की विशेषता
- यह श्राद्ध उन सभी पितरों के लिए होता है जिनकी मृत्यु तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी रही हो।
- चतुर्थी श्राद्ध करने का विधान श्राद्ध पक्ष के चतुर्थ दिन किया जाता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी महीने में हुई हो।
- इस दिन श्रद्धालु श्रद्धा, नियम और विधिपूर्वक तर्पण, पिंडदान, और ब्राह्मण भोजन कराते हैं।
- ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों को तृप्त करता है और उनकी आत्मा को शांति और गति प्रदान करता है।
- साथ ही, घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।