आचार्य चाणक्य विद्वान होने के साथ एक अच्छे शिक्षक भी थे। उनकी बताई बातें और शिक्षाएं मनुष्य के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है, उन्होंने अपनी चाणक्य नीति में कई ऐसी बाते बताई हैं जिनके अनुसार कुछ कार्यों में संयम बरतना आवश्यक होता है, नहीं तो व्यक्ति को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कुछ चीजे ऐसी हैं जिनके पीछे मनुष्य निरंतर भागता रहता है, और उसे पाने का प्रयास करता रहता है लेकिन अत्यधिक लालच या किसी चीज को लेकर अत्यधिक असंतोष नुकसानदायक होता है। इसलिए कुछ चीजों के लिए संतोष रखना जरूरी होता है।
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आचार्य चाणक्य
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चाणक्य नीति के अनुसार, पुरुषों को स्त्रियों के मामले में जल्द बाजी न करते हुऐ संयम से काम लेना चाहिए। स्त्रियों के मामले में लालसा रखने वाले व्यक्ति कभी सम्मान नहीं पाते हैं। स्त्री से मिलने वाले प्रेम, सुख औऱ व्यव्हार से संतोष करना चाहिए। जबरदस्ती प्राप्त करने की लालसा नहीं रखनी चाहिए। जो ऐसा करते हैं, वह जीवन में काफी नुकसान उठाना पड़ता हैं। इसलिए स्त्रियों के मामले में पुरुषों को संयम से काम लेना अति आवश्यक होता है।
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कुछ लोग स्वादिष्ट भोजन देखकर उसे खाते समय बिल्कुल संतोष नहीं रखते हैं, और क्षमता से अधिक भोजन कर लेते हैं। लेकिन चाणक्य के अनुसार भोजन कितना भी स्वादिष्ट लेकिन भोजन करते समय हमेशा संतोष से काम लेना चाहिए। किसी भी चीज की अति नुकसान दायक होती है उसी तरह सही मात्रा में किया गया भोजन जहां हमारे शरीर को पुष्ट बनाता है, वहीं अत्यधिक भोजन करना नुकसानदायक साबित होता है।
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चाणक्य नीति के अनुसार मनुष्य को धन से जुड़े मामलो में मनुष्य को संयम बरतना अति आवश्यक होता है। धन से जुड़ी बातों को गुप्त रखना चाहिए, लेकिन धन पाने की लालसा में व्यक्ति को कभी गलत रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, और न ही कभी दूसरो का धन देखकर अपने मन में लालच लाना चाहिए। नहीं तो ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में एक दिन बहुत पछताते हैं। धन के मामले में संतोष रखना जरुरी होता है। मेहनत और ईमानदारी से कमाया गया धन ही व्यक्ति के लिए सही रहता है। गलत कार्यों से कमाया गया धन व्यक्ति के पास कभी नहीं टिकता है।