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अहोई अष्टमी 2026: अहोई माता की पूजा कब करें? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

Sat, 17 Oct 2026 11:36 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 17 Oct 2026 11:36 PM IST
सार

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं। जानें अहोई अष्टमी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और तारों के दर्शन का समय।

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Ahoi Ashtami 2026 Know the Date Auspicious Muhurat and Significance of the Fast in hindi
अहोई अष्टमी - फोटो : amar ujala

Ahoi Ashtami 2026 Date and Muhurat: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत में तारों को अर्घ्य देने की विशेष परंपरा है। आइए जानते हैं साल 2026 में अहोई अष्टमी कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है।

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कब है अहोई अष्टमी 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। अहोई अष्टमी के दिन शाम को तारों के दर्शन करके व्रत खोलने की परंपरा है। चूंकि अष्टमी तिथि में 1 नवंबर को शाम के समय तारों के दर्शन होंगे, इसलिए इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन माताएं सुबह से व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करके संतान की खुशहाली की कामना करती हैं।

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अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त

अहोई अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी पर पूजा और तारों के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग में दिए गए समय के अनुसार, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और व्रत से जुड़े प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • अहोई अष्टमी व्रत: 1 नवंबर 2026, रविवार
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 4:59 बजे से 6:15 बजे तक
  • तारों के दर्शन का समय: शाम 5:22 बजे के आसपास
  • चंद्रोदय का समय: रात 11:05 बजे के आसपास
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अहोई अष्टमी की पूजा विधि - फोटो : amar ujala

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

  • सुबह व्रत का संकल्प लें: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और संतान की खुशहाली की कामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल तैयार करें: घर के पूजा स्थान की सफाई करें। अहोई माता की तस्वीर या चित्र स्थापित करें।
  • पूजन सामग्री अर्पित करें: माता को रोली, अक्षत, फूल और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
  • अहोई माता की कथा सुनें: पूजा के समय अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • तारों को अर्घ्य दें: शाम को तारे दिखाई देने पर परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें और संतान के अच्छे स्वास्थ्य व लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
  • व्रत का पारण करें: अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारों के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोलें। कुछ परिवारों में चंद्र दर्शन के बाद व्रत पूरा किया जाता है।
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अहोई अष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व

अहोई अष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
अहोई अष्टमी का पर्व मातृत्व, संतान के प्रति प्रेम और परिवार की खुशहाली से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अहोई माता की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। यह व्रत करवा चौथ के कुछ दिन बाद और दीपावली से पहले आता है। इस वजह से उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इसका विशेष महत्व है। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को अहोई माता की पूजा, व्रत कथा और तारों को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है।

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