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Chaitra Navratri 2022: मां दुर्गा का पांचवा स्वरुप है मां स्कंदमाता, जानिए मां का स्वरूप, पूजा विधि , मंत्र और सब कुछ

Wed, 06 Apr 2022 07:32 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 06 Apr 2022 07:32 AM IST
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Chaitra Navratri 2022 Worship Maa Skandmata in the fifth form with this puja vidhi know her swaroop and mantra
चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। - फोटो : amar ujala

Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। कल 6 अप्रैल यानि बुधवार को मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि स्कन्दमाता भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। इन्हें मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता के रूप में पूजा जाता है। शास्त्रों में मां स्कंदमाता की आराधना का काफी महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है, सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। ऐस में मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है। इसके अलावा स्कंदमाता की कृपा से संतान के इच्छुक दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त हो सकता है। आइए जानते हैं मां के स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और आरती के बारे में। 

Chaitra Navratri 2022 Worship Maa Skandmata in the fifth form with this puja vidhi know her swaroop and mantra
स्कंदमाता का स्वरुप मन को मोह लेने वाला है।

मां स्कंदमाता का स्वरुप
स्कंदमाता का स्वरुप मन को मोह लेने वाला है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिससे वो दो हाथों में कमल का फूल थामे दिखती हैं। एक हाथ में स्कंदजी बालरूप में बैठे हैं और दूसरे से माता तीर को संभाले हैं। मां स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है। मां का वाहन  सिंह है। शेर पर सवार होकर माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरुप स्कन्दमाता के रुप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।

Chaitra Navratri 2022 Worship Maa Skandmata in the fifth form with this puja vidhi know her swaroop and mantra
स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम दिया गया है।

कैसे पड़ा मां स्कंदमाता नाम
स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम दिया गया है। यह कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है। पुष्कल महत्व शास्त्रों में इसका पुष्कल महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है।

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Chaitra Navratri 2022 Worship Maa Skandmata in the fifth form with this puja vidhi know her swaroop and mantra
स्कंदमाता को रोली-कुमकुम लगाएं और नैवेद्य अर्पित करें।  - फोटो : istock

पूजा विधि

  • सबसे पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • अब घर के मंदिर या पूजा स्थान में चौकी पर स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। 
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें फिर एक कलश में पानी लेकर उसमें कुछ सिक्के डालें और उसे चौकी पर रखें। 
  • अब पूजा का संकल्प लें। 
  • इसके बाद स्कंदमाता को रोली-कुमकुम लगाएं और नैवेद्य अर्पित करें। 
  • अब धूप-दीपक से मां की आरती उतारें और आरती के बाद घर के सभी लोगों को प्रसाद बांटें और आप भी ग्रहण करें। स्कंद माता को सफेद रंग पसंद है इसलिए आप सफेद रंग के कपड़े पहनकर मां को केले का भोग लगाएं। 
  • मान्यता है कि ऐसा करने से मां निरोगी रहने का आशीर्वाद देती हैं।
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स्कंदमाता का इन मंत्रों से जाप करें।

स्कंदमाता का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

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